दोस्तों,चंदामामा के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है की वो किस प्रकार की पत्रिका थी,वो एक अनोखी पत्रिका थी जिसकी कहानियां भारतीय लोक कथाओं और प्राचीन इतिहास से प्रेरित थीं.चंदामामा की कहानियों के चित्र एक अनोखी अलौकिक दुनिया में पाठकों को सैर करवाते थे,ऐसा लगता था जैसे हम कोई राजा-रानी वाली प्राचीन एनीमेशन फिल्म देख रहे है.
चंदामामा में जो फीचर मुझे सबसे अधिक पसंद था वो था 'विक्रम-बेताल',इसकी कथाएँ उस समय एक अजीब सी सिहरन और रोमांच जगाती थी और कहानी में अंत तक उत्सुकता बनी रहती थी.बेताल का विक्रम से प्रश्न पूछना,विक्रम का जवाब देना और न बोलने की शर्त के भंग होते ही बेताल का वापस उड़ कर पेड़ पर चले जाना...और उस पर प्राचीन चित्र..सब मिला कर कहानी में एक ऐसी अबूझ दिलचस्पी पैदा कर देते थे जिसको वर्णन करने के लिए ठीक से शब्द नहीं मिल रहे.
तो दोस्तों,आज की पोस्ट उसी विक्रम-वेताल की कथा से ही जुडी है,कैसे?....आइये मिलकर जानते है.
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