दोस्तों,इस ब्लॉग पर इतने तवील अरसे बाद हाज़िरी भरने के लिए आप सबसे मुआफ़ी की दरख्वास्त है । दरअसल हुआ यह था कि रुचियों के सामायिक परिवर्तनों के चलते ब्लॉग से तबियत उचटी और फेसबुक पर जा ठहरी जहाँ कुछ अरसे तक मशहूर लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक साहब के कद्रदानों के बीच रहा.......कुछ उनकी सुनी और कुछ अपनी कही |
बहरहाल,एक बार फिर आप सबके बीच हाज़िर हूँ एक नयी पोस्ट लेकर जिसमे हम बात करेंगे एक ऐसी फ़िल्म की जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि वह तब थी जब बनी थी । यह एक ऐसी फिल्म है जो जितनी ईमानदारी से सवाल उठाती है उतने ही सशक्त ढंग से उनका जवाब भी देती है । यह एक ऐसी फिल्म है जो देखने वालों को झकझोर देती है और उन्हें कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है । यह वह फिल्म है जो शायद आप में से ज़्यादा लोगों ने देखी न हो या शायद नाम भी न सुना हो और अगर ऐसा है तो यह वो फ़िल्म है जिसका नाम आपको मरने से पहले देखी जाने वाली फिल्मों की फ़ेहरिस्त में शामिल कर लेना चाहिए ।
दोस्तों,उस फ़िल्म का नाम है 'गर्म हवा' जो सन 1973 में प्रदर्शित हुई थी और जिसके मुख्य कलाकार थे 'बलराज साहनी,फारूख शेख़,गीता सिद्धार्थ,जलाल आग़ा,ए.के हंगल,युनुस परवेज़,जमाल हाशमी' इत्यादि ।
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बहरहाल,एक बार फिर आप सबके बीच हाज़िर हूँ एक नयी पोस्ट लेकर जिसमे हम बात करेंगे एक ऐसी फ़िल्म की जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि वह तब थी जब बनी थी । यह एक ऐसी फिल्म है जो जितनी ईमानदारी से सवाल उठाती है उतने ही सशक्त ढंग से उनका जवाब भी देती है । यह एक ऐसी फिल्म है जो देखने वालों को झकझोर देती है और उन्हें कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है । यह वह फिल्म है जो शायद आप में से ज़्यादा लोगों ने देखी न हो या शायद नाम भी न सुना हो और अगर ऐसा है तो यह वो फ़िल्म है जिसका नाम आपको मरने से पहले देखी जाने वाली फिल्मों की फ़ेहरिस्त में शामिल कर लेना चाहिए ।
दोस्तों,उस फ़िल्म का नाम है 'गर्म हवा' जो सन 1973 में प्रदर्शित हुई थी और जिसके मुख्य कलाकार थे 'बलराज साहनी,फारूख शेख़,गीता सिद्धार्थ,जलाल आग़ा,ए.के हंगल,युनुस परवेज़,जमाल हाशमी' इत्यादि ।
