दोस्तों,यूँ तो हिंदी सिनेमा ने एक से एक प्रतिभाशाली निर्देशक वक़्त-वक़्त पर सिनेमा दर्शकों को दिए हैं जिन्होंने अपनी कला से हम सब को लम्बे समय तक चमकृत किया है परन्तु जब कभी कोई नया निर्देशक बहुत कम समय में ही अपनी फिल्मों से बहुत अधिक उम्मीदें जगा दे और अचानक ही रुपहले परदे से गायब हो जाये या बहुत जल्द ही अपनी चमक खो बैठे तो बरबस ही यह ख्याल आता ही आख़िरकार ऐसा क्या और क्यों हुआ उसके साथ!
आज हम बात करेंगे ऐसे ही कुछ निर्देशकों की जिन्होंने आशा से अधिक उम्मीदें जगाई लेकिन जब उन्हें परवान चढाने का वक़्त आया तो वो गैर-हाज़िर थे अथवा हाशिये पर.
इस कड़ी में सबसे पहला नाम ज़हन में आता है 'मंसूर खान' का जिन्होंने 'क़यामत से क़यामत तक,जो जीता वही सिकंदर,अकेले हम अकेले तुम' और 'जोश' जैसी फिल्में बनाकर अपना नाम अति-प्रतिभाशाली निर्देशकों के सूचि तो दर्ज तो करवा लिया परन्तु उसके बाद अचानक ऐसा क्या हुआ जो उन्हें फिल्मों और फ़िल्मी दुनिया से दूर ले गया ये समझ नहीं आया!आइये मिलकर इसी तरद्दुद(परेशानी) को दूर करने की कोशिश करते हैं.
Continue Reading »
आज हम बात करेंगे ऐसे ही कुछ निर्देशकों की जिन्होंने आशा से अधिक उम्मीदें जगाई लेकिन जब उन्हें परवान चढाने का वक़्त आया तो वो गैर-हाज़िर थे अथवा हाशिये पर.
इस कड़ी में सबसे पहला नाम ज़हन में आता है 'मंसूर खान' का जिन्होंने 'क़यामत से क़यामत तक,जो जीता वही सिकंदर,अकेले हम अकेले तुम' और 'जोश' जैसी फिल्में बनाकर अपना नाम अति-प्रतिभाशाली निर्देशकों के सूचि तो दर्ज तो करवा लिया परन्तु उसके बाद अचानक ऐसा क्या हुआ जो उन्हें फिल्मों और फ़िल्मी दुनिया से दूर ले गया ये समझ नहीं आया!आइये मिलकर इसी तरद्दुद(परेशानी) को दूर करने की कोशिश करते हैं.
