Thursday, June 3, 2010

# कथा तीसरे वेताल की

UPDATE 4th June:The download link for original strip,Sunday No.122, of this presented story has been provided for comparison and analysis purpose.

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 दोस्तों,प्रस्तुत है एक और रोमांचक दुभागीय वेताल कथा आप सब की खिदमत में जो की एक बार फिर वेताल वृतांतों से ली गई है और इस बार इस कथा में फ़ाल्क बता रहे हैं की कैसे सिकंदर का हीरे का प्याला वेताल के वृहद कोषागार में आया.
ये कथा और एक वजह से भी महत्व रखती है और वो है इस कथा में 'भारतवर्ष' का जिक्र होना,वैसे तो वेताल कथा में भारत का जिक्र होना कोई नयी बात नहीं है क्योंकि फ़ाल्क ने शुरू में वेताल का घर भारत में ही सोचा था और शुरुआत की सभी कहानियां भारत के शहरों 'मद्रास,बॉम्बे,कलकत्ता' आदि में ही घटित हुई थी,पर इंद्रजाल कॉमिक्स ने अतिरिक्त कुटनीतिक सतर्कता दिखाते हुए किसी भी विवाद को टालने के मंशा से संवादों आदि में कांट-छांट की जिससे की भारत से जुडाव किसी भी कथा में प्रतीत न हो,जैसे की 'बंगाला' को 'डंगाला' कर दिया,'The Belt' कथा में समुंद्री लुटेरे 'रामा' को 'रामालु' कर दिया गया था,यहाँ तक की इस कथा में भी 'India' को बदल के 'Xenia' कर दिया गया है.बहरहाल,वापस कथा पर लौटते हैं,ऐसे बदलावों के बारे में हम आगे और पढ़ेंगे.





























(Cover courtesy:Pret Sharma)


हीरे के प्याले की जड़ें जुड़ती है तीसरे वेताल के समय तक जहाँ एक राजनैतिक षड़यंत्र के तहत उस दौर के सुल्तान मैमूद बिन एलिना की हत्या होने ही वाली थी पर ऐन मौके पर तीसरे वेताल का आगमन होता है,सुल्तान की जान बच जाती है और दोनों में मित्रता हो जाती है.
सुल्तान India(Xenia) की यात्रा को जाता है और वापस लौटता है वहां के महाराजा की लड़की पर आसक्त होकर.सुल्तान,जो अब तक वेताल पर बहुत भरोसा करने लगा था और उसको अपने वारिस के रूप में भी देखने लगा था,वेताल को अपनी मंगेतर और भावी पत्नी को लिवाने के लिए हीरे का प्याला उपहार सहित देकर भेजता है.राजकुमारी 'पुरा' इस बेमेल रिश्ते से खुश नहीं है पर उसको मजबूरन सहानभूत वेताल के साथ विदा होना पड़ता है.लेकिन होनी को कुछ और ही मंज़ूर था,रास्ते में वेताल की मित्रभक्ति एवं निष्ठां राजकुमारी के प्रेम के आगे हार जाती है.आगे क्या होता है,क्या वेताल सुल्तान से बचकर राजकुमारी को भगा ले जाने में सफल हो सका,हीरे के प्याले की भूमिका क्या रही,सुल्तान ने इस विश्वासघात का बदला कैसे लिया ये सब जानने के लिए पढ़िए प्रस्तुत कथा जिसका शीर्षक है "कथा तीसरे वेताल की"



























यह सन्डे न.122(26th August 84' to 17th Feb 85') का इंद्रजालिक संस्करण है जिसका अंग्रेजी शीर्षक था "Alexander's Diamond Cup".इंद्रजाल कॉमिक्स ने कूटनीतिक कारणों से वास्तविक कहानी के संवादों में फेर-बदल की,कुछ पैनल्स में कांट-छांट की और यहाँ तक की एक चरित्र का नाम भी बदल दिया.राजकुमारी पुरा की नौकरानी या मेड का वास्तविक नाम था 'अरुणा' पर इंद्रजाल वालों ने उसे बदल कर 'रुना' कर दिया जिससे के कही से भी इस कहानी का सम्बन्ध भारतवर्ष से न झलके.




















यह पैनल्स देखिये जहा पर सुल्तान के India जाने की बात हो रही है और कैसे इंद्रजाल ने उसकी जगह Xenia लिखा.

















और एक पैनल को इंद्रजाल संस्करण से बिलकुल उड़ा दिया गया था जहाँ डायना 'इंडिया' पर कुछ टिप्पणी करती है,देखिये इस पैनल को जो आप इंद्रजालिक संस्करण में कही नहीं पाएंगे.














और भी कई पैनल्स में बदलाव किया गया था या उन्हें बिलकुल गायब कर दिया गया था जहाँ 'इंडिया' का नाम आ रहा था या उसके बारे में कुछ कहा गया था.बानगी देखिये....

















यूँ तो इस कथा का हिंदी अनुवाद उच्च श्रेणी का था पर फिर भी कहीं-कहीं कुछ ऐसी गलतियाँ हो गई थी जो बड़ी अटपटी लगती हैं,जैसे की ज़रा गौर फरमाइए इस पैनल पर जहाँ वेताल सुल्तान को 'मालिक' कह कर संबोधित कर रहा है...ऐसा संवाद वेताल की गरिमामयी और प्रभावशाली शख्सियत को ओछा साबित करता प्रतीत होता हैं.

















जबकि वास्तविक संवाद था "Sir" जिसको इंद्रजाल वालों ने 'मालिक' समझा,सचमुच बहुत बेढंगी गलती थी ये.देखिये original panel.















और एक बात,ज़रा देखिये नीचे दिए गए इन दोनों पैनल्स को और तुलना कीजिये की दोनों के संवादों के क्या फ़र्क है.







जी हाँ,संवादों में से एक नाम "कुब्ला खान" हटा दिया गया है,एक बार फिर उसी वजह से जिसका की ज़िक्र ऊपर पहले ही किया जा चुका है.
चलते-चलते आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ एक बहुत बड़ी तथ्यात्मक भूल की तरफ,वैसे इसे भूल की संज्ञा नहीं दी जा सकती क्योंकि फ़ाल्क वेताल-इतिहास में गाहे-बगाहे बदलाव करते ही रहते थे.कभी वेताल पूर्वजों के मृत्यु कारणों में बदलाव करते थे,कभी वेताल पत्नियों के विवरण में तो कभी ऐतिहासिक तथ्यों में जैसा के इस कथा में भी किया है.
देखिये तो प्रस्तुत कथा के इस पैनल को जिसमे वेताल शिखर को तीसरे वेताल के समय में होना दिखाया गया है.

अब ज़रा गौर फरमाइए इस पैनल पर जो की लिया गया है सन्डे न.125(Phantom Head Peak) से जिसमे बूढ़ा मोजज़ वेताल शिखर के बनने की कथा सुना रहा है और जो उसके कथनानुसार सातवें वेताल के समय में शहंशाह जूनकर द्वारा बनवाया गया था.


अब अगर वेताल शिखर तीसरे वेताल के समय से ही मौजूद था,जैसा की प्रथम पैनल द्वारा सिद्ध है,तो वो सातवें वेताल के समय में कैसे बन सकता है!!
ऐसी ही कई तथ्यात्मक भूलों का फ़ाल्क ने अपने जीवनकाल में निवारण करने में कोई खास रूचि नहीं दिखाई और फलस्वरूप अपने पीछे वो वेताल इतिहास को अनुमान और अटकलों का विषय बनने देने के लिए छोड़ गए हैं.


Download Sunday Strip No.122-Alexander's Diamond Cup

49 comments:

माधव said...

nice

chaltaphirtapret said...

कॉमिक भाई : आज मैं जब रात के 10 :15 pm पर कंप्यूटर को बंद करके सोने के बारे में सोच ही रहा था की मेरी नजर CW के ब्लॉग पर जा टिकी और टिकती भी क्यों ना , नजारा ही कुछ ऐसा था "कथा तीसरे वेताल की" पोस्ट भी कर दी ज़हीर जी ने , वैसे भी वेताल कथा सुनने और पड़ने के लिए तो मैं सारी रात भी जाग सकता हूँ और जब कथा हिंदी मैं हो और सुनाने वाला कोई और नहीं बल्कि हम सब के आपने CW यानि की ज़हीर जी हों तो कथा का मजा दस गुना हो जाता है , क्या तुलनात्मक अध्यन किया है, क्या तर्कशीलता और पहली बार किसी ने चित्रों के माध्यम से इंद्रजाल कॉमिक बनाम सन्डे स्ट्रिप को पेश किया है ( ਓਹ ਚਕਤੇ ਫੱਟੇ ! ਦਿਲ ਖੁਸ਼ ਕਰ ਦਿਤਾ ਓਏ !!!!) इंद्रजाल ने यह कथा सन्डे स्ट्रिप न 122 से ली , इस जानकारी के लिए शुक्रिया , आज से मैं आपको cw नहीं बल्कि Dr.CW कहा करूंगा क्योंकि आपने तो कॉमिक्स अध्यन में P.hd किया हुआ है , सन्डे स्ट्रिप न 125 में वेताल शिखर के बनने की बात , और स्ट्रिप न 122 में वेताल शिखर का मौजूद होना , क्यों फाल्क साब , आपने क्या सोचा था की आपकी इस गलती को कोई भी नहीं पकड़ सकता , हमारे CW भाईसाब की नजरें चील से भी तेज हैं . हम लोग सिर्फ पड़ते हैं और ज़हीर जी पड़ते भी हैं और साथ ही उनके दिमाग का scanner भी चल पड़ता है फिर कोई गलती कैसे छिपी रह सकती है !
वैसे भी मुझे वर्तमान वेताल से ज्यादा उसके पूर्वज वेताल के हथियार ज्यादा पसंद हैं, पूर्वज वेताल के पास तलवार और एक लम्बी पिस्टल होती थी जो देखने मैं काफी आकर्षक थी, वह सब यादें आज फिर से ताजा हो गयी , धन्यवाद कॉमिक भाई आपका इस गाथा को अपने अंदाज में सुनाने का !!!!!

kuldeepjain said...

चलता फिरता प्रेत ने बिलकुल सही उपाधि से नवाजा है.. DR CW . शुक्र है जहीर भाई कि बारीक़ नज़र अभी यहाँ तक नहीं पहुची कि पेनल ४ में इंक अलाने कंपनी कि थी और इंद्रजाल में इंक फलाने कंपनी कि थी जिसका मालिक चाय में दो चम्मच शक्कर ही डालता था .
जहीर भाई इतनी जायदा खोज खबर रख कैसे लेते हो ? आपकी ऐसे पोस्ट पढ़कर शर्मिंदा हो जाते है कि हम कहे के कॉमिक्स प्रेमी है जो ऐसी बातो पे ध्यान ही नहीं दे पाते.
इस कॉमिक्स में हर कुछ था जो वेताल कि कॉमिक्स में होता है बस जो बात अजीब सी लगी वो ये कि एक 'प्रेम शरबत ' का जिक्र था जिसे पीने के बाद वेताल भाई दोस्त सुल्तान को भूल कर शहजादी के प्यार में दीवाने हो जाते है..
आज ऐसा कोई शरबत होता तो ?
ये सिकंदर का प्याला भी क्या खूब था. आज अगर है और मुझे मिल जाये तो कसम से रोज उसमे शिकंजी या लस्सी पियु ,, इंद्रजाल पढ़ते या जहीर भाई कि पोस्ट पढ़ते..
यु कि बस मजा आ जायेगा..
कहने कि जरुरत नहीं बेहद उम्दा पोस्ट..

Silly Boy said...

Some months back I had read this story as Diamond Comics digest. Good story. Your analysis in mind-blowing. Shall try to compare the daily strips with that version. Though D/C did not change the name of India but not sure about other things. Your recent series on Phantom stories is very good. Especailly the analysis part. It increases the passion for reading that particular story. I am process of acquiring all the strips of Phantom. Shall be more competent once I acquire them all. By the way you have not replied till yet my last comment. Still waiting your views on that comment.

Apka Silly Bhai said...

Comic bhai(good name given to you by Chatlaphirta pret) one more request. Is is possible for you to send me the scans of one Motu-Patlu feature of Diwana you posted about 3 years back. I tried to find them today but the images are not available now. They are in black-white. I have a ledger printer now-a-days and so I want to take a print-out of those scans to make a small comic of my own. One more request try to make soft copy of all the available features of Motu Patlu and Chhotu Lambu available with you. I want to collect all the features of Motu Patlu.We have to save them for posterity. You have a sizeable number of them both as Diwana and Lot Pot. So try to save them especially the Diwana ones which might only be available with YOUand more particularly the black and white ones as the print out of them taken out on ledger printer gives the most near result to the original.
Netao ki tereh is baar sirf wayda nahi-O.

chaltaphirtapret said...

Dr .CW : जैसा की आपकी पता ही है की इस कथा का दूसरा भाग मेरे पास नहीं है, बरसों से तम्मना थी इस कथा के दुसरे भाग को हिंदी में इंद्रजाल के रूप में ही पडूँ बेशक diamond comics ने Digest के रूप में इस कथा को पूरा किया , लेकिन diamond comics digest भव्यता के मामले में इंद्रजाल से कोसों दूर रहे , हाल ही में इस कथा के दुसरे भाग को इंद्रजाल के रूप में पड़ा लेकिन english में, कहने का तात्पर्य यह की दोनों ही बार मजा नहीं आया लेकिन आज इस कथा को पूरा हिंदी में पड़ लिया इंद्रजाल के रूप में और अतृप्त मन शांत हो गया , धन्यवाद ज़हीर भाई,
अब इस पूरी कथा में मुझे क्या अच्छा लगा, यह जरुर बताऊंगा
पृष्ठ न 7 : वेताल की बलखाती मासपेशिऊं में लहराती उसकी झन्नाटेदार तलवार का वार और सेनिकों का घुटनों के बल बेठ कर हाथ जोड कर माफ़ी मांगना और वेताल को महाबली की उपाधि से नवाजना , डायना का शाहना अंदाज में कथा को सुनना
पृष्ठ न 16 : राजकुमारी का अपनी नापसंद बताना और वेताल का न चाहते हुए भी सांत्वना देना और खयालों में अपने घोड़े पर राजकुमारी के साथ बेठ कर बादलों में उड़ना ! अत्ति उत्तम !
पृष्ठ न 38 में राजकुमारी और वेताल का एक दुसरे को इजहारे मौहबत करना !
पृष्ठ न 39 में एक दुसरे के गले मिलना
पृष्ठ न 43 और 44 पर भी गौर फरमायें कैसे वेताल बैखौफ होकर अपने बलशाली कंधे पर तलवार रख कर ३ नरभक्षी शेरों के सामने अपने घोड़े पर शान से बैठा है तभी राजकुमारी पूरा का कूदना , शेरों का लपकना , वेताल का राजकुमारी को झपटना और पन्ना न 45 पर लोगों का चिलाना "बहुत बढ़िया, कमाल , वाह " यह उत्कृष्ट दृश्य देख कर तो मेरा मन भी खड़े होकर ताली बजाने का हुआ (क्या आजकल है ऐसा सच्चा प्यार , की एक प्रेमिका ३ शेरों की परवाह किये बिना आपने प्रेमी के पास जाये इस तरह से ..... अगर है तो जरुर बताएं ) इस सच्चे प्यार को मेरा नमस्कार !
आप सब ने कारों को तो ब्रेक लगाते रोज ही देखा होगा मगर किसी घोड़े को ब्रेक लगाते देखा है और वह भी पहाड़ी की ढलान पर , नहीं न , तो पृष्ठ न 45 के नीचे देखिये ! चौंक गए न इंद्रजाल की चित्रकारी पर !!!
अंत में मैं यही कहना चाहूँगा Dr . CW से की आपने यह जो हिंदी इंद्रजाल की जो बारिश शुरू की है इसे कभी भी थमने मत देना ताकि हम सब इस हिंदी इंद्रजाल की रिमझिम फुहारों का आनंद यूँ ही उठाते रहें
धन्यवाद
आपका
विशाल (प्रेत)

PBC said...

There were many IJC which had such translation & edited panels. Thanks to Frew publication's issue numbers greater than #910 which are complete and unedited reprints strips, we can read many complete stories. Actually Many Frew are available online as strips!

Yes, there are few strips which has such mistakes, but worth enough to read & can say same about IJC.

Who are missing Frew's strips, can download all from here: http://bookscomics.blogspot.com/2009/01/100-indrajal-comics-50-miscellanous-and.html


P.S. Pls check part 1, there is only 31 pages.

Comic World said...

माधव: Thanks and Welcome to comic world.

Comic World said...

CPP: विशाल भाई,बहुत शुक्रिया तारीफ़ की चाशनी में डुबो कर लिखे गए अल्फाज़ों का,सच,आप एक बहुत सहज-सरल हृदय के स्वामी हो.कॉमिक्स में उपाधि लेने जैसी तो कोई बात नहीं है,हाँ,बस कॉमिक्स पढ़ते समय उसके लेखक,चित्रकार एवं दुसरे सम्बंधित लोगों की जानकारी पाने पर ध्यान थोडा ज़्यादा रहता था बनिस्बत सिर्फ कॉमिक के,और कोई ख़ास बात नहीं.
इस कहानी के बारे में आपके ख्यालात बिलकुल सही है,सच में एक बेहद उम्दा कहानी है यह,और वैसे तो मरहूम(स्वर्गीय) ली फ़ाल्क साहब की कलम से निकली सारी वेताल कथाएँ ही बेहद दिलचस्प और बेजोड़ हैं जिनकी जितनी तारीफ़ की जाये उतनी कम है.
चलते-चलते,और हाँ,आपने गुरुमुखी/पंजाबी में क्या लिखा हैं?वो समझ नहीं आया.

Comic World said...

Kuldeep Jain: कुलदीप भाई क्यों शर्मिंदा करते हो यार...आप जैसा कॉमिक विद्वान,जीता-जागता कॉमिक एवं नोवेल जानकारी-कोष किसी के लिए ऐसे प्रशंसा भरे शब्द कहे,अहोभाग्य!
यह देखकर अच्छा लग रहा है की आपकी रूचि इंद्रजाल कॉमिक्स में बढ़ती जा रही है और आप की हाज़िरी बज़्मे-इंद्रजाल में मौका-दर-मौका होने लगी है.सच में हम इंद्रजाल शैदाइयों(इंद्रजाल प्रेमी) की महफ़िल अधूरी थी आपके बिना अब तक.
जिस 'प्रेम शरबत' का जिक्र इस कथा में किया गया था वो शायद मदिरा होगी जिसके पीने के बाद इन्सान का अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रहता और दिल की बात खुल कर जुबां पर आ जाती है,ये भी हो सकता है की राजकुमारी पुरा के पिता ने दाई अरुणा को कोई ऐसा नशीला पेय साथ देकर भेजा हो इस हिदायत के साथ की दाई वो पेय राजकुमारी को पिलाकर अपने नियंत्रण में रखे जिससे की राजकुमारी रास्ते में कोई ऐसी-वैसी हरकत न कर सके और सुल्तान के पास बखैरियत पहुँच सके.

Comic World said...

SB: Thanks for the praiseworthy words,yeah,correct,though DC published this story in its unedited form but the format,coloring and page quality of DC was below substandard hence there the reading was not such joy as it was with Indrajal.
Let me know from which particular post you wish to have that Motu-Patlu feature so that i can mail you those particular scans.
Your comment on previous post is to be replied soon,pl give me some time as your comments are among one of those comments which require proper concentration and attention.
Bhai,i am not into netagiri,you will soon acknowledge ;o)

Comic World said...
This comment has been removed by the author.
Comic World said...

PBC: Yeah,true.These can't be exactly termed as mistakes because it was a peculiar habit of Falk to rewrite/twist/modify Phantom history in accordance with the taste suiting to the comparatively newer stories during his whole career.
In part 1 the back page of cover page is missing as it was pasted under the hard binded cover,but it won't affect the story in any way as it was only a ad page,i will be posting it after scanning it from a another copy.

chaltaphirtapret said...

Dr.Saab : हम पंजाबी लोग जब किसी बात पर बहुत ही ज्यादा खुश होतें हैं तो फिर कहते हैं (ਓਹ ਚਕਤੇ ਫੱਟੇ ! oo chakte fatte , ओ चकते फटे - मतलब "you have done a wonderful job !! ) (ਦਿਲ ਖੁਸ਼ ਕਰ ਦਿਤਾ ਓਏ !!!! दिल खुश कर दिया ओये ) यह पंजाबी ishtyle है !

Anupam said...

Great work Jaheer Bhai,

Its a great comparison. I too like IJC, but there are times when I really get irritated due to their editing. There are issues where a single frame and almost same identical dialogue has been used for 3-4 times in continuation. But they are a precious gems like any Phantom Story, so still the mistakes are overlooked always.

btw, not seeing you uploading Indian comics recently. Its been more than 50 days since you have uploaded any Indian Comics. Just being greedy, take your time. Bye

Comic World said...

CPP: विशाल भाई एक बार फिर से शुक्रिया पंजाबी स्टाइल की बधाई के लिए भी.

Comic World said...

Anupam: Thanks and welcome Anupam Bhai.
Yeah,it seems irritating but since these stories were first published as newspaper strips at a daily and weekly basis therefore it was felt necessary by Falk to remind the readers about the story so far at a regular basis to maintain continuity,which naturally crept into the comic version too.
Anyhow,these reminders also do have their own charm and add to the attraction of the story.
Yeah,agree with you about delay in posting of Indian comic but as you also must be aware of that i am posting IJCs after a huge time gap,and that also because i felt to post them with discussions or something meaningful to say about the story as well as other facts.
Similarly,will be posting non-ijc comics too when i will be having something meaningful to say and share about it.

chaltaphirtapret said...

DR . CW : आपसे हार्दिक निवेदन है की आप अपना ध्यान सिर्फ और सिर्फ हिंदी इंद्रजाल कॉमिक्स को पोस्ट करने पर ही केन्द्रित करें , मत भूलिए अपने ब्लाग के आरंभिक अलफ़ाज़ को "This is a blog site specially for all comic lovers of INDRAJAL and other comics." इंद्रजाल कॉमिक्स के लिए प्यार तो आज भी हमारी नस नस में प्रचंड वेग से प्रजवलित है , रही बात की आपने 50 दिन से कोई indian comics पोस्ट नहीं की है तो यह भी नहीं भूलना चाहिए की आपने इंद्रजाल कॉमिक्स को एक लम्बे अरसे के बाद से पोस्ट करना आरम्भ किया है, और मेरे अनुसार तो इंद्रजाल भी भारतीय ही है क्योंकि यह प्रकाशित तो हमारे देश में ही होती थी ! और वैसे भी 1980 के दशक में मुख्य रूप से इंद्रजाल , मनोज चित्र कथा और DIAMOND कॉमिक्स इत्यादि ही आते थे , जिनमे गुणवत्ता के आधार पर अगर कोई इंद्रजाल को टक्कर दे पाया वह थी मनोज चित्र कथा (केवल बड़े आकर वाली न की मनोज कॉमिक्स )
ज़हीर भाई , वैसे भी जबसे आपने हिंदी में वेताल कथाओं का यह जो सुनहरा दौर शुरू किया है तब से मैं भी पूरे जोशो खरोश से हिंदी इंद्रजाल को पोस्ट करने में लगा हूँ और हमारा सपना है हिंदी में 803 इंद्रजाल कॉमिक्स को पोस्ट करना !! कृपया अपना ध्यान हिंदी इंद्रजाल पर ही केन्द्रित करें नहीं तो मैं आपसे पक्का रूठ जाऊँगा और और कॉमिक्स पोस्ट करना भी छोड़ दूंगा , अब फैसला आपके हाथ में है
आपका
प्रेत (दुखी हिर्दय से )

Comic World said...

CPP: प्रेत भाई आप परेशान न हों,इंद्रजाल कॉमिक्स तो अपने-आप में बेजोड़ हैं जिसका कोई सानी नहीं.रही बात उनपर ध्यान केन्द्रित करने की तो मेरा ध्यान तो कभी भी इंद्रजाल से दूर नहीं हुआ था,बस,एक समय जब इंद्रजाल की बहार आई हुई थी ब्लाग्स पर तब मैं ज़रूर मैंने खुद को उस भेड़चाल से दूर कर लिया था क्योंकि सिर्फ कॉमिक पोस्ट करना कभी भी इस ब्लॉग का उद्देश्य नहीं रहा है.इस ब्लॉग का उद्देश्य तो स्वस्थ और रोचक चर्चा के साथ कॉमिक्स पढ़ना और पढ़वाना है.
जी हाँ,इंद्रजाल भी काफी हद तक भारतीय ही है,क्या हुआ अगर उसमे अधिकांश चरित्र विदेशी हैं तो,हमारे भारतीय चरित्र,जैसे की बहादुर,दारा इत्यादि भी तो उसी का ही हिस्सा रहे हैं.
कॉमिक वर्ल्ड मुख्यतया कॉमिक्स को समर्पित ब्लॉग है जिसकी मुख्य प्रेरणा स्रोत निसंदेह इंद्रजाल कॉमिक्स ही रहीं हैं,अत: अपनी नींव से तो ज़्यादा दिन दूर रह सकने का तो प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता.

nahlawat said...

well its something loveable i dont know how to write in hindi so i am sorry but many many thanks to this blog only 10 days ago i come to know about all these comic blogs and seriously i was amazed i used to think i am biggest comic lover because never met anyone who had so much passion for comics i wish i can still get all comics at shops and frankly speaking i love them reading in hindi only i have some request i want u to start one project on manoj comics and chitarkatha there are so many stories which are amazing please do reply it my first first post

Comic World said...

Nahlawat: Welcome to Comic World friend,its always nice to come across a fellow comic lover like you.
Its easy to write in Hindi too,you can take help of google transliteration for it.
Manoj Chitrakatha are also among one of my favorite comics and many of them had been posted at this blog also,you can check yourself.
I too love to read comics in Hindi preferably and like to write/discuss about them.Can i know exactly what sort of project you wish to start!..and yes,every comment on this blog is considered precious and answered quickly.

Lalit oberoi said...

Hey Brother, Thanks for this awesome post once again, more than comic, i enjoy your writing. As i am admirer of hindi language, i am more interested in your Hindi writing skills. Great work, keep it up.

btw, Please put your next post on some old bollywood magazine and also put some scans of interesting articles and reviews of old movies.

Thanks brother for awesome work ... :)

Comic World said...

Lalit Oberoi: Many thanks Lalit Bhai for your kind words,comments like yours encourages and inspires me a lot to keep going like this,yeah,a post on old Bollywood Hindi magazines is due from a long time,hope to prepare it soon.
Thanks again.

Computer Singh said...

I really like these kind of old gems, please visit my site http://computersingh.blogspot.com I am also planning to use this for great Manoj Chitra Katha store.

PD said...

वाह भई वाह.. यह पोस्ट ही नहीं, इसकी टिप्पणियां भी बढ़िया है.. Thanks buddy.. :)

Comic World said...

PD: स्वागत है आपका.जी हाँ,एक यही तो सरमाया है कॉमिक वर्ल्ड का.

sagar said...

i. previous also i have visited to your blog but that days i WAS not very much familier with net i read most of the blogs tbhre were words written about REAL DAAKU.

SO LIKE TO MENTION 1 DAAKU WHO STAYS IN GK NAME M.GUPTA. PLS BEWARE OF THAT DAKU COZ HE ALMOST TOOK ALL MY RARE ENGLISH INDRAJAL STARTS FROM NO 29.(approx 600 )

THANX ZAHEER BHAI MANY MANY THANKS TO SHARE ALL INFORMATION ABOUT CD'S CHEATER..!!

kuch baate ho jaye comics ke baare me, aaj bhi america me 5 GHAR ME SE 1 GHAR KE LOG COMICS KHARID TE HAI aur per day 1720000 copies comics sell hota hai lakin yaha per comics craze aur bhi cum ho raha hai AAKHI KYUN ?

Maaf karna agar bahadur ki wapasi bhi ho jaye woh chalega nahi , bahadur hi kyu agar vetal, mandrake bhi aa jaye to bhi nahi chalega kyuki AB COMICS PREMI BACHE HI KITNA HAI 1, 10, 100 YA 1000.new generation me koi craze nahi hai aap free me kisi new generation ke bacche ko hindi ka koi bhi comics dekar dekhiye woh accept hi nahi karega..!!

IN SABKE LIYE KAUN JIMMEWAR HAI.agar taknik ( tv, computer, mobile)jimmewae hoto to america me itne comics nahi bikta...?

IS BAAT KO HAMAIN HI FIND OUT KARNA HAI......!!!.
AUR EK BAR PHIR WOH SUNHARA YUG WAPAS LAUTANA HAI....!!!.

sagar said...

dear friends i came to know if we print 1000 copies of any issue of indrajal it cost max 50 rs per copy with total colour and more clear picture so how the idea is ? but problem is we r not 1000 person actual real comic lovers are very and very few if some one do as above mention reprint i will buy 2 copies it seems we need just be 500 people but how to make the unity ? main problem......!!

nahlawat said...

well sagar thats an nice idea why dont we make a site where we can unite these people ask comic-guy if he can start that and i am sure once we start there will be people who will buy them and gift to kids and friends most important we have to make a list of comics that need to be print in order that way we can start our own comic company

sagar said...

Thanx nahlawat,Agree your suggestion from this post i will like to ask COMIC GUY is it possible ? for example indrajal comics no 1 to 25, because in this days it is very RARE and people ask it for couples of thousand rupees.
do u believe one person asked me rs 5000 for no 7 indrajal hindi
and another guy told his rate rs3000 for MCK DIGEST khooni danav.thesE type of people are crazy, wants to take benefit from our CRAZYNESS..to avoid these type of broker we should be together in one unit and should ask the permission to bennett n colmon for the reprint of indrajal comics
AGAIN THANX nahlawat you are the first person who stands with me .!!!

nahlawat said...

well u are right i just started my blog comic-india.blogpost.com somehow i could not opne page everytime it says this site is running team viewer
and i am seriously thinking about getting these rare comics reprint if anyone ever been to madhu muskan publishing house in mayapuri do tell me if i can get old comic from there

PD said...

फिलहाल तो मुझे भी अपने साथ समझे.. :)

Comic World said...

Dear friends ts true that if a large no. of copies are reprinted then the cost per copy will be eventually less and within reach of a average comic lover but the problem here is that there are not sufficient no. of comic lovers available who are seriously interested in obtaining 'hard' copies of these comics.In past also a similar idea was floated on blogs but the required no. of comic lovers didn't turned up and idea died its natural death after waiting quite a long.
So friends the idea can be materialized only if sufficient no. of comic lovers really shows up their interest in it.

sagar said...

i have been to gulab house in 2005 but not found any person the out side guard told me its been several years now no body is in gulab house" so i dropped my dream i have searched to mr. jagdishji THE GREAT ARTIST ( i got address from MADHUMUSKAAN NO 5OO )but not found now days i came to know where he works. This time i will meet him .one thing like to say english madhumuskaan was published after the no 200 of hindi so no 1 english madhumuskaan means not the early issues so do not be confused.!!
I DO GOT SOME RARE MADHUMUSKAAN FROM KANPUR AND DELHI.,eg.no 31, 41,63,66, 67,69, 71, 72, 83, 84, 86, 88, 89, 91, 93, 94,100,as the coversation with mr. ajay misra sir, soon u will get it on line and other rare comics. I promised to ajay sir for benefit of all comic lover i will help up to my best .from this post :"I REQUEST TO ALL COMIC LOVER" WHAT TYPE OF COMIC ( hindi comic only) you WANT ON ONLINE I WILL TRY TO ADJUST FOR SCAN WITH THE HELP OF SCAN MASTER AJAY MISRA SIR.!!
THANKS PD AND WELCOME .!!!

sagar said...

Some people misunderstood my behaviour they thinks sagar is doing every help for

his behalf . YES I AM GREEDY FOR COMICS COZ I LOVE IT TOO MUCH

and the concern of MONEY every people are selfish but iam selfish only for my sincerlly earned money.

,if somebody thinks sagar makes money from comics I laugh for their stupidity.!!

DO YOU SELL YOUR MOTHER, FATHER, TRUE FREN FOR MONEY ?

some person thinks their comics is like gold and others comic is like junk

from today i AVOID these type of people.

why iam explaing all these things .i donot need to explain any way planning to make my own web site where every true comic lover can get A TO Z FREE rare comics in digital formet .!!!

"kisine sach hi kaha hai " Neki kar Aur Dariyame Daal.

Rahul Rattan said...

Thanks dear...I cannot express the feeling I m having after seeing all these comics after almost 15-20 years...I thank you from the core of my heart...:-) please keep it going...

I am a Fauladi singh fan..There are 2 fauladi singh comics which I desperately want...

1.Fauladi singh aur sitraon ka dushman (part 2 of pagal robot)

2.Dreamland ka badshah (part 2 of globe ka atank).

I will be grateul to you if you could post these comics for download..there are many ppl who wants them.

Many thanks again...Hats off to you brother..

sagar said...

According to me iam also fauladi singh fan but only aswini aashus fauladi singh . in indian comic history there is only 1 writer who is ALLROUNDER THAT WAS MR .ASHWINI AANSHU HE WAS AS GOOD AS ACTION AS WELL AS HUMOUR ALSO. HE WAS BRILLIANT IN INDIAN HISTORY OF COMIC I FOUND ONLY 1 WRITER WHO IS SMALL SIZE OF LEE FALK.

AND OTHER COMIC WRITERS ARE JUST THE PHOTO COPY OF HOLLYWOOD HEROS,

SUPER COMMANDO DHURVA COPY OF ROBIN AND MOST OF ANUPAM SINHAS STORIES ARE COPIED BY HOLLYWOOD STORIES .

FOR ME ASWINI AANSHU WAS IS WILL REMAIN BEST...!!!

SOME FAULADI SING COMIC LIST FROM THE WRITER ASHWINI AANSHU

FAULADI SINGH =GLPBE KA AATANK, DREAMLAND KA BADASHAH,ANTARIKSH ME SANGRAAM,CHHIPKALI KA PRATISHODH, SITARO KE DUSHMAN, PAGAL ROBET, DHHOE KI AAURAT,CHAKRAVIU KA MASHIHA,MAUT KI DHARTI, ZAHARILA SADYANTRA,INDRAJAL,MAYABI SUNDARI,ANTARIKSH KI PRETAATMA, SWARG KE BHAGWAN,ANTARIKSH KI APASARA,ANTARIKSH KA MAHATMA ETC ETC..!!

Rahul said...

Hi sagar.. I fully agree with you..Fauladi was best when written by Ashwini ashu and graphics by Jugal kishore..later Bharat makwana came and spoiled the entire graphics... can somebody help me get those 2 comics mentioned above in my previous post? Also the entire Joker series was superb..it was much ahead of its time..not sure if anybody has Joker series I tried contacting diamond comics..but they have only few left..almost all are recent ones...

sagar said...

hello rahul, yes u r right jugal kishor is also one of the great artist in reality base cartoon. i do got fauladi singh comics approx all , u have to wait up to DASHARA coz i will be at delhi and approx 100 rare comics are going to be scanned through out me and mr.ajay misra sir.!!including your required comics also.!!

Rahul said...

Hi Sagar wow that is indeed a great news..:-) do you have the joker series too? I think i was a complete idiot that I threw away all my comics to raddi wala..

BTW why wait till dusshera? thats a long time man? i cant wait to read them....

sagar said...

Dear rahul , for your kind information there is not much comics of joker series max 3/4 comics . series of joker used to come in "ANKUR" and diamond publications combined all stories and released in fauladin singh digest so comics are very few.pls inform the name of joker series that i can explain rite now i remembered only two comics 1.joker pujari ka intaqam 2. maut ka darwaja ...!!

rahul said...

Hi Sagar...Well u surely know a lot more than I know about comics yes you are rite it was ankur comics. and there were not many comics ..I dont remember the names now.but yes I remember it used to be a digest...it was mainly a single story ( much like Raka in chacha chaoudhary series) wherein Joker always used to reincarnate himself. Faulad never defeated him..I also remember in one of the story joker planted a tree which instead of producing fruits used to produce humans...it was really very entertaining...

deven said...

dear

i have some indrajaal comic of vetaal, how i can send it to u or your post for every one. please tell me.
my email address is:
devengehlot@yahoo.co.in
devengehlot2@gmail.com

sagar said...

Hello rahul,
some name of ANKUR whiuch is based on the joker(name).
1.ankur aur khatarnak joker.
2.........joker ka sikanja
3.........joker ka chamatkar
4..........joker ki wapasi
5........joker ka apharan
all joker series you will get soon on net but wait up to DASHARA..!!

Rahul said...

hello Sagar...:-)feel like hugging you yaar.. i had never thought i would be able to see these comics again...:-) but you didnt tell why wait till Dusshera?

sagar said...

hello rahul,
why dashara? coz rite now iam in other city and my comics collection is in another city approx 550 kms far..
thats why...!!

Rahul said...

Hi sagar..
oooooh now I understand.....so guess 4-5 months wait is in order...anyway shall keep in touch with you....:-) many thanks...

bhart yogi said...

maja aa gay 37 sal ka javan ek bar fir 7 sal ka bachcha ban gaya ,,,bachpan me lane vale dost tumko humara salam

Comic World said...

Bharat Yogi: You are welcome Bharat bro.

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