Monday, February 11, 2013

अंक #292 - बहादुर और चुड़ैल की चुनौती





(Friends this post is authored by Vishal bhai for which lots and lots of thanks to him) 


























हिंदी इंद्रजाल कॉमिक्स  के चाहने वालों को मेरा यानि की 'विशाल' का सलाम ! दोस्तों इस बार मैं ले कर आया हूँ बहादुर की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान , इंद्रजाल का अंक # 292  (The Challenge of Witch) यानि की


      "बहादुर और चुड़ैल की चुनौती"

चेतावनी : कमजोर दिल वाले इस पोस्ट को मत पड़ें और रात के वक्त तो हर्गिज  नहीं !!




आप सभी का चुडैलों की दुनिया में स्वागत है, अरे आप सब बाहर क्यों खडें हैं , डरो मत ! इत्मिनान से अन्दर आयें , दरवाजा खुद ब खुद खुल जायेगा ! जरा अन्दर कमरे में  बेठ कर इस कहानी का शुभारम्भ करते हैं , ऊऊऊऊउ , वहूऊ


भूत प्रेत - चुड़ैल , यह नाम की काफी है दिल दहला देने के लिए , बचपन में दादी नें खूब अच्छी तरह से डरावनी कहानिया सुना सुना कर डराया . हालाँकि मेरा रोज शाम को घर वापसी   का रास्ता शॉर्टकट के चलते  सुनसान ही है , लेकिन आजतक किसी चुड़ैल से आमना सामना नहीं हुआ , यह चुडैलें होती कैसी हैं , इनका क्या रूप होता होगा , शायद खुले बाल , उलटे पैर ....बड़ी बड़ी आँखें एकदम स्थिर ! कहीं ऐसा तो नहीं :



मैंने तो यह भी सुना है की आधी रात के वक़त खेतों में यह चुडैलें नाच गाना भी करती है , और खूब छन छन्ना छन करती है (अगर कोई देखने का इच्छुक हो तो रात के 1 बजे  खेतों में इनका मधुर संगीत सुन सकता है :(
मैंने तो यह भी सुना है की रेलवे क्रासिंग पर आधी रात के वक़त भूत प्रेत और चुडैलें विचरती है , कुछ इस तरह से शायद :-



उह्ह्ह आःऊऊऊ .....अरे दोस्तों निकलो इस उजाड़ बिया वान से  , उस चुड़ैल की आंखों में ज्यादा मत देखो भागो भागो , 'जल तो जलाल तू आई बला को टाल तू '

 जल्दी से शुरू करते हैं कहानी लेके प्रभु का नाम ! हाँ तो ...  कहानी शुरू होती है लाखन  डाकू के अच्छे व्यवहार की वजह से जेल से छुटने पर


 वो अब अपनी जिन्दगी खेती बाडी  से शुरू करता है , उसकी बीवी है और बच्चा  भी , जो अब अपनी जिन्दगी ख़ुशी ख़ुशी जी रहे हैं , नए नए सपने संजो कर



पर  इनकी खुशियों पर  ग्रहण लगने वाला है क्योंकि इस गाँव पर पड़  चूका है एक चुड़ैल का साया :( (यह चुड़ैल शब्द  ही काफी है डर से कांपने के लिए )




                                   लाखन का बच्चा इस चुड़ैल का पहला शिकार बनता है
 

बहादुर के पूछने पर लाखन चुड़ैल के बारे में बहादुर को बताता है  



बहादुर चुड़ैल का किस्सा सुनकर बैचैन सा हो उठता है , वो जादू टोने और टोटके की बातें पूछने लगता है (बहादुर और ऐसी बातें ! )



लाखन की बीवी भी चुड़ैल का शिकार बन जाती है







          लाखन गुस्से से पागल हो उठता है , लाखन की जगह पर कोई भी हो वो भी ऐसे ही पागल हो उठेगा



 मगर लाखन भाई , आप अपनी बन्दुक से बदला लेना चाहते हो क्या ? गोली किस पर चलाओगे ! क्योंकि चुड़ैल   तो दिखलाई ही नहीं देती मेरे भाई , मैंने तो सुना है की यह तो साये सी होती हैं , कुछ ऐसे (गडब  :(




और अगर  यह नजर आ जायें तो  तो भईया गए काम से , इस पोस्ट को तैयार करते वक्त मुझे लगा की मेरे पीछे कोई है ! :( उस वक्त मैं कमरे में अकेला भी था , लेकिन डरते डरते पीछे देखा तो कुछ भी नहीं , तो कृपया आप भी इस पोस्ट को पड़ते वक्त अपने पीछे की दीवार का खास ख्याल रखें , कहीं .........कोई ......यी इ इ इ ऎऎ एईए  ....भाई मैंने तो "भूत पिशाच निकट नहीं आवे , महावीर जब नाम सुनावे" को मन ही मन पड़ कर इस पोस्ट को पूरा किया , तो आप सब भी इस पोस्ट को पड़ते वक्त इसीका जाप मन में करें , क्या मजाल किसी चुड़ैल भूतनी की जो पीछे की दीवार में छुपे ! अब आप सब अपने पीछे देखना बंद करें , कोई नहीं खड़ा आपके पीछे :) अरे बाप रे यह पीछे की दीवार मैं कौन छुपा है ...वोह्ह  वओ वू (भगवान् खैर करे !)
 


 चलिए कहानी की और रुख करते हैं , अब इस चुड़ैल नें अपना   अगला निशाना चुना है बहादुर को ! आधी रात के वक़त , बहादुर की लाल हवेली के ऊपर  भयंकर रूप लिए चुड़ैल ( उफ्फ ! कितना खौफनाक दृश्य है )


जब बहादुर को पता चलता है की चुड़ैल नें अब अपना रुख लाल हवेली की और कर लिया तो  बहादुर बदहवासी में तपाक से उठ खड़ा होता है (बहादुर ! और चेहरे पर घबराहट के लक्षण !! यह मैं क्या देख रहा हूँ , बहादुर भाई !!!)


चुड़ैल के निशाने पर है खूबसूरती की  परिभाषा यानि की 'बेला ' भी (भला बेला नें क्या बिगाड़ा है चुड़ैल का)    

         स्वर्ग की अप्सरा "बेला"                                  कहानी की चुड़ैल                          




लाल हवेली  की छत पर बहादुर आधी रात के वक़त यह नीचे पड़ी किस लड़की की लाश को देख रहा है , तो क्या बेला ..... नहीं नहीं नहीं , ऐसा हरगिज नहीं हो सकता ..चुड़ैल मैं तेरा खून पी जायूँगा ...



दोस्तों ,दुआ करो की यह बेला ना हो :( , बल्कि चुड़ैल ही हो :) , पर सुना है चुडैलें तो कभी मर नहीं सकती ! अब  इस कशमकश से निकलने के लिए इस खौफनाक कथा को पड़ना ही पड़ेगा जिसका नाम है :



डर के मारे मेरी तो सिट्टी पिट्टी गुम  हो गयी है :(  अब आप सबसे विदा लेता हूँ

नोट : भूत - प्रेत ,चुड़ैल , यह सब मन का वहम है , और कुछ नहीं , यह पोस्ट केवल मनोरंजन के उदेश्य  के  लिए ही तैयार की गयी है :)

"चुड़ैल की चुनोती" ('विशाल' प्रस्तुति )



37 comments:

Comic World said...

विशाल भाई इस धाँसू और डरावनी पोस्ट के लिए तहेदिल से शुक्रिया । इस बार बड़े ही अनोखे और नए अंदाज़ में आपने यह पोस्ट तैयार की जिसमे लगी आपकी कठिन मेहनत को देख बंदा सलाम करता है । कहानी के भयावह तत्व को आपकी तस्वीरों ने और भी भयावह तरीके से उभार दिया जिन्हें देख कर बरबस ही डर लगने लगता है । बहुत खूब,विशाल भाई । भई बहुत खूब !

AJAY said...

Vishal ! Nice scans came . The same comic was posted perhaps on this blog earlier too , your scans as well presentation is much better . Keep it up

HojO said...

A most fascinating Bahadur adventure,no doubt!I read all Bahadur's adventures and loved most but this one is different.Apart from the thrill-factor,common in all adventures,this tale('Dayini-r Protihinsha' - in Bengali)was quite scary,filled with lot of twists and gore!!
Evenif you know you are reading only a comic,but those graphic presentation of brutal killing of Lkahan's family members,one by one started from his beloved son to his wife,will surely shock the readers!

Thanks for posting such a classic! :)

Gaurav Arya said...

THANKS VISHAL BHAI !!!!! Mai ek baar fir kehna chahta hoon ki Vishal bhai presentation ke mamle me aap ka aur Zaheer bhai ka koi jawab nahi hai. Sach me maza double ho jata hai comic padhne ka.

TIGER said...

I have never seen such a horrible post on any blog and i mean it ! To blend a comic book story with full on horror touch ,jabardast. I salute u for your incredible presentation. You are MR PERFECT of comics blog world.

Regards,
Lakshay

Gaurav Gandher said...

Thanks a lot Bro for this one and special thanks for your details, loved them as well the images

sonaly day said...

Select the floral way of gifting that this gift zone could give you. Turn the eve filled with floral specialties, and let www.rightflorist.in/Delhi/Delhi_Florist.asp shape up your emotions in a charming way.

Shivkumar Vaishnaw said...

Thanks, Vishal Bhai for this comic & your Details.

VISHAL said...

कॉमिक ,भाई , मुक्त कंठ से की गयी प्रशंसा के लिए तहे दिल से शुक्रिया ! और आपको डर भी लगा ! यही तो इस पोस्ट का मकसद था , डर और मनोरंजन का मिश्रण , पहले मुझे संदेह था की कहीं इसका डरावना पहलू सबको पसंद आये या ना आये , लेकिन आप जैसे धाक्कड़ पारखी का इस पोस्ट को सलाम बहुत ही बड़ी बात है ! बहुत बहुत शुक्रिया आपके दिल को छु जाने वाले अल्फाजों का !

VISHAL said...

@ Ajay: Thanks for liking scan quality. Yes this story was published in this blog on 18 July 2007 but in English ! You can check this link :


http://comic-guy.blogspot.in/2007/07/comic-no33-challenge-of-witches.html

VISHAL said...

@HojO : This story is the best example of horror-thrill-suspense mixture ! I have never seen Bahadur talking about black magic with such anxious facial expressions in any other story !

What is the meaning of Bengali word
'Dayini' (is it witch ?)and 'Protihinsha' ?

VISHAL said...

@Gaurav Arya : शुक्रिया गौरव आर्य जी , भाई आपका कमेंट पड़ कर मेरा उत्साह चौगुना हो जाता है :) ! दिल से लिखी गयी टिपण्णी के लिए आपका एक बार फिर से तहेदिल से शुक्रिया !

VISHAL said...

@ Lakshay 'Tiger" : In my opinion, all those IJC Bloggers are Mr. Perfect , who are still posting Indrajal comics for the last 5 or 6 years !
Main motto of this post was to highlight and extract fear factor of this thriller ! Thanks for liking my presentation :)

VISHAL said...

@ Gaurav Gandher : गौरव जी , आप का बहुत बहुत शुक्रिया ! आप यहाँ पर पधारे , पोस्ट को देखा, सराहा और इस नाचीज का काम आपको पसंद आया , मेरे लिए यह बहुत सौभाग्य की बात है !

VISHAL said...

@ ShivKumar Vaishnaw : शिव भाई , आप नें अपना बेशकीमती समय इस पोस्ट के लिए निकाला , मैं आपका दिल से आभारी हूँ , बहुत बहुत धन्यवाद

Raj said...

Dear Vishal Bhai, your presentation is better or your post is better, my mind is going bananas over this dilemma. Being a blogger myself, I find my level below kindergarten after seeing your style of posting, I definitely have to go a very long way in pursuit of learning to even think of coming someplace near you. In short... I DON'T HAVE WORDS TO PRAISE YOUR POST. Just keep it going in order to teach us-bloggers...how to blog. Amazing, Mind blowing, fantastic, fabulous....I am still scratching my head and turning pages of dictionary...rest...understand.

Vidyadhar said...

bahot badhiya Vishal bhai...

Venkitachalam Subramanian said...

I am the late comer to the party. Good post and analysis. Though Hindi is not my primary language (for that matter English also is not my primary language), I studied Hindi till my Post Graduation and so I can read and enjoy Hindi.

I have always been a fan of Vishal's posting, and have been rooting for him to be more frequent. Now that there are more blogs devoted to Hindi IJCs, I am sure he should not find it difficult to find a place to park his posts.

All the best Vishal. Thanks Zaheer for your dedicated 6 years of posting.

Raj Joshi said...

Thanks to Vishal for this hahakari post!
Vishal bhai..please post the first part of this story IJC 284. THis was posted in 2007 on this blog..link below. Waiting for the Hindi one...

http://comic-guy.blogspot.com/2007/06/comic-no29-white-ghosts-den.html

BABABU said...

what a unique style of posting!
I m really really got scared.Post more n more such post Mr vishal

Raj Joshi said...

We are all waiting to see what's next and when Vishal Bhai's Pen is going to write next....
Amazing work..please let us know the next as we are all waiting eagerly...

VISHAL said...

@राज भाई : आपको पोस्ट और उसे प्रस्तुतिकरण करने का तरीका पसंद आया , मेरे लिए यह सुभाग्य की बात है ! भाई आप सभी इंद्रजाल ब्लॉगर मेरे प्रेरणा स्रोत रहे हो , और आपका तो हिंदी इंद्रजाल की दुनिया में एक वशिष्ट स्थान है , आपका योगदान अतुलनीय है मेरे भाई !

VISHAL said...

@ विद्याधर भाई : आपको मेरा काम पसंद आया , मुझे यह जानकार बहुत ख़ुशी हुई , आपका बहुत स्वागत है

VISHAL said...

@ Venkitachalam Subramanian :This comment is the most memorable one for me ! Pioneer IJC Blogger Venkit Bhai is a FAN OF MY POSTING !!! WOW! This is a proud moment for me. Start this Party NOW !!!

VISHAL said...

@ Raj Joshi : हार्दिक अभिनन्दन राज जोशी भाई , आप यहाँ पर तशरीफ़ लाये , मुझे बहुत ही ख़ुशी हुई
मैं जल्द ही आपके सामने एक और जल्वाफिरोज पोस्ट के साथ हाजिर होऊंगा , आप यहाँ पर आते रहे और अपना प्यार यूँ ही बरसाते रहें

VISHAL said...

@ Bababu : Welcome General Welcome !If Gen.Bababu got scared, it mean everyone got scared. In near future i will post few more horror post. So stay tuned General !

Raj Joshi said...

Vishal Bhai...A popular demand from your fans...more..more..more of Hindi IJC, PLEASE!

Ashish Yadav said...

Thank you Vishal Bhai, and Zaheer Bhai.

VISHAL said...

राज जोशी जी , कोशिश करूँगा एक और स्कैन करने की :)

VISHAL said...

आशीष यादव जी,आपका हार्दिक स्वागत है ,उम्मीद है की आपको डर लगा होगा :)

imran said...

vishaal bhai..sach me majaa aa gya..kya presentation h...ek bar to mene b pichche ki diwar ko dekha..:)..keep it up...

Raj Joshi said...

When is the next mega presentation...Hum to aankhein bichaye baithe hain...

VISHAL said...

इमरान साब , भाई आपकी टिप्पणी पडकर तो रकत्संचार ही तेज हो गया ! भाई मेरे मैंने भी सच में इस पोस्ट को बनाते वकत कई बार पीछे की और देखा पलट कर ! अकेला जो था कमरे में :(
आपकी खिदमत में मैं इस रविवार फिर से आ रहा हूँ So stay tuned !

VISHAL said...

जनाब राज जोशी जी , आपके शायेराना अंदाज नें मेरे इन्द्रजालिये प्रेम को फिर से जागृत कर दिया है ! तो जनाब इस महाशिवरात्रि को मिलते हैं एक "विनाशक प्रेम कथा" के साथ :)

aditya M said...

vishal bhai

itna darane ke liye aap ki kambal kutayi hoti agar hostel men mil jate


waah kya post
kya samaa bandha hai aapne

lekhni itni pakki ki man khush ho gaya

zaheer bhai, mujhe aap or vishal bhai jaise doston par naaaz hai


aditya

VISHAL said...

आदित्य जी

आपने होस्टल का जिक्र किया , तो कई सुने सुनाये किस्से याद आ गए ! भाई मेरे मैंने तो सुना है की कई होस्टलों में भी एक आध कमरा 'भूतिया' होता है , बिलकुल कोने में , हर समय ताला लगा हुआ , आधी रात को अन्दर से रोने और हंसने की मिश्रित भयावह आवाजें ...... :-(
आदित्य भाई , ऐसा मैं नहीं लोग कहते हैं जो होस्टल में रह चुके हैं ! अब लोगों का क्या है , लोग तो कुछ भी कह देते हैं मनघडंत , आप अपने होस्टल में मजे से रहे :)

अब भाई मेरे , अगर हमें हंसने और रोने का हक है तो क्या "उन्हें" नहीं है ? ;) हा हा हाहा हाहा

Amit Bedi said...

विशाल भाई ऐसी पोस्ट दुनिया में कहीं पढने को नहीं मिलती पोस्ट के लिए धन्यवाद्|
काफी अर्से से इस ब्लॉग पर कोई पोस्ट नहीं पढ़ी है कृपया पोस्ट करना जारी रखें

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