Wednesday, February 12, 2014

# Anniversary Post

दोस्तों इस फ़रवरी इस ब्लॉग ने अपने वजूद के पूरे सात साल मुक़म्मल कर लिए हैं । जी हाँ, कॉमिक वर्ल्ड को वजूद में आये इस चार फ़रवरी को पूरे सात साल का अरसा हो चुका है । जैसा कि दस्तूर हैं कि हर सालगिरह पोस्ट में पिछले सालों की, उपलब्धियां तो नहीं कह सकते हैं बल्कि ब्लॉग के चलन की विवेचना ज़रूर की जाती है । यह ब्लॉग, जोकि शुरू हुआ था इस वाहिद मक़सद के साथ कि इंद्रजाल कॉमिक्स पर ख्याल, यादें और अनुभव साथी इंद्रजाल कॉमिक्स प्रेमियों के साथ साझा किये जाये, वह समय के साथ-साथ कॉमिक्स पर ही न सीमित रहकर उपन्यासों, बाल पॉकेट बुक्स, फ़िल्मों इत्यादि को भी अपने घेरे में लेने लगा जिसे आप लोगों ने पसंद भी किया क्योंकि आरंभिक कॉमिक्स स्कैन करने और शेयर करने की प्रक्रिया के अलावा इस ब्लॉग ने कॉमिक्स और उनकी कहानियों पर भी तब्सिरा करना आरंभ किया जिसमे ख़ासतौर से इंद्रजाल कॉमिक्स की कहानियों पर विवेचना पसंद की गई ।
चुनिंदा फ़िल्मों की दृश्य-दर-दर विवेचना भी एक नया प्रयोग थे जिसे भी आपने सराहा मसलन 'शक्ति' फ़िल्म पर पोस्ट जिसमे फ़िल्म की ख़ासियतों का वर्णन उनसे सम्बंधित दृश्यों के साथ किया गया था । 

बहरहाल इस पोस्ट का मक़सद जिस चीज़ पर चर्चा करना है वह मेरे दोनों शौकों-यानि कॉमिक्स और फ़िल्म-का हाइब्रिड है जोकि है ऐसी कॉमिक जिसे आजकल ग्राफ़िक नॉवेल के नाम से ज्य़ादा जाना जाता है । 'शोले' फ़िल्म हाल ही में थ्री-डी फॉर्मेट में भी प्रदर्शन के कारण चर्चा में थी और अब इस फ़िल्म पर सिप्पी बंधुओं द्वारा दो कॉमिक्स, जिन्हे ग्राफ़िक नॉवेल कहा जाता है, निकाली गयी हैं । पहली कॉमिक हैं जिसमे फ़िल्म शोले की कहानी एक कॉमिक के रूप में पेश कि गई है । 



   




















शोले फ़िल्म जोकि एक किवदंती का रूप ले चुकी है उसे एक कॉमिक के शक़्ल में देखना एक रोमांचक अनुभव है जो कोई भी 'शोलेबाज़' मिस करना नहीं चाहेगा ।  




इस फ़िल्म के मशहूर संवाद कॉमिक में अंग्रेज़ी भाषा में पढ़ना भी एक रोमांचक अनुभव है जोकि इस कारण रोमांचक बना रह सका क्योंकि भाषा की हदें भी इस फ़िल्म की लोकप्रियता पर असर नहीं डाल सकीं । ज़रा बानगी देखिये, 'तेरा क्या होगा कालिया' को अंग्रेज़ी में किस तरह अनुवाद किया गया है: 


  

अब अगर देखा जाए तो 'तेरा क्या होगा कालिया' का सीधा और सपाट अनुवाद बनता है What will happen of you, Kaaliya? लेकिन कॉमिक में इसको लिखा गया है What's gonna become of you,Kaliya?, जोकि ज्य़ादा सटीक और फिट है बनिस्बत What will happen of you, Kaaliya? के । 

इस ग्राफ़िक नॉवेल की प्रिंटिंग एवं काग़ज़ क्वालिटी बेहद उच्च दर्जे की है और चित्र भी निहायत ही नयनभिराम जोकि आपको एक बार लिए चलते हैं उसी दुनिया में जहाँ आप पहले भी कई बार फ़िल्म के ज़रिये जा चुके होंगे । फ़िल्म के मशहूर दृश्यों को भी उसी अंदाज़ में कॉमिक में चित्रित किया गया है जिस अंदाज़ में उन्होंने परदे पर अपना जलवा बिखेरा था । मसलन ट्रेन-चेज़ दृश्य में ठाकुर का बुलेट से जय-वीरू की हथकड़ियाँ खोलना हो या फ़िर ट्रेन का पटरी पर रखे लकड़ियों के गट्ठर को रौंदते हुए निकल जाना हो । 





कॉमिक पढ़ते समय पूरी फ़िल्म आपके दिमाग में भी साथ-साथ चलने लगती है और कॉमिक एवं फ़िल्म के दृश्यों में आपको समरूपता सी नज़र आने लगती है और आप एक फ़िर एक नए अंदाज़ में इस कालजयी फ़िल्म का रस्वादन एक अलग ही तरीके से करने का मौका पा जाते हैं जो आपको फिर एक बार लुत्फ़अंदोज़ करता है । 








दूसरी कॉमिक में गब्बर के बचपन और पृष्ठभूमि को एक कॉमिक की शक़्ल में पेश किया गया है और उसकी खूंखारता और वहशत के पीछे के कारणों को तलाशने की कोशिश की गयी है । 


  


इस कॉमिक में बताया गया है कि गब्बर, डाकू गब्बर सिंह कैसे बना और उसके पिता हरी सिंह(जिसका कि फ़िल्म में सिर्फ़ एक मर्तबा ज़िक्र आता है जब अदालत में गब्बर की पेशी होती है) की क्या भूमिका थी उसके डाकू बनने में ।  गब्बर सिंह इतना अड़ियल, वहशी और दुर्दांत क्यों बना, उसके अंदर एक ऐसे हत्यारे के जरासीम पैदा कैसे हुए जो एक बच्चे को भी अपनी गोली का निशाना बनाने से नहीं चूकता । इस कॉमिक में इन्ही सब कारणों की जड़ों को टटोला गया है । 

कुल मिलकर किस्सा-ए-इतना है कि अगर आपको फ़िल्म शोले पसंद है और बेहद पसंद है तो कोई वजूहात ऐसी नहीं है कि आपको यह कॉमिक्स पसंद न आएं । और अगर आप कॉमिक संग्राहक भी हैं तब तो आप इन कॉमिक्स का अपने संग्रह में न होना किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते जोकि आपको करना चाहिए भी नहीं ।  





यह दोनों कॉमिक्स किसी भी ऑनलाइन बुक शॉप पर उपलब्ध हैं जहाँ से आप इन्हे इनके प्रिंटेड मूल्य पर अच्छी डिस्काउंट के साथ खरीद सकते हैं । 


चलते-चलते आपको उस नतीजे की भी कुछ झलकियाँ दिखलाता चलूँ जोकि इस ब्लॉग के कारण ही वजूद में आया । अगर यह ब्लॉग न होता तो यह नतीजा भी न होता जिसकी कि कुछ तसवीरें नीचे चस्पा हैं । 














































21 comments:

Prabhas Upadhyay said...

Pehle to Badhai Zaheer Bhai ....

Or itne Khatarnak sangrah ke pics aapne laga rakkhe hain ..Jald hi ghar me daikiti dalwayenge aap ;)

Dhanybaad

nahlawat said...

aapke likhe article hamesha mazedaar hote hai i feel you should be writing for magzines or newspaper

Ashish Yadav said...

बहोत अच्छी पोस्ट

Lekin comics missing kyon hai Zaheer bhai?

Silly Boy said...

First my congratulations for completing 7 years of blogging. Out of these 7 years I am following your blog for about six and half years. Your anniversary posts till 5th anniversary were like "Utsav" but now it seems you have lost a little bit of interest in blogging. Anyways it is personal choice and interest. For this to some extent I think your regular readers, including myself, a little bit of responsbile as in the subsequent period they visit the blog regularly but at times hesitate to discuss on the topic through long and meaningful comments as comments for comments sake is not enough for creative people like you (and me). I do not know others but my creative sauce had almost dried in the last few years and at times I am at a loss how to write though there were lot of ideas in my mind but all of them abstract and absurd which I could not put in order to present it in lucid form for a meaningful discussion on a topic in the blog. I hope good days of your blog (and my creative sauce) will come again. Even if not I am following your updates on facebook. Doesn't matter.

Vidyadhar said...

Congratulations Bhai. Abhi to blog ko 7 saal huye hain. Blog isse bhi kafi aage jaye uske liye shubhkamnaye. (y)

parag said...

सात साल पूरे करने की बहुत बहुत बधाई।पिछले कुछ समय से ब्लागिंग काफी कम हो गयी है।सोशल साइट के जमाने में ब्लाग से लोगों को जोड़ कर रखना एक चुनौती पूर्ण कार्य है।आज कल innovation का जोर है चीज़ों का जीवन चक्र सिकुड़ता जा रहा है।आज ब्लॉग के साथ हो रहा है कल सोशल हाइट के साथ भी ऐसा ही होगा।
मुझे शोले का कामिक स्ट्रीप के रूप में आना ज्यादा आकर्षित नहीं करता है।यह केवल पश्चिम में चल रही marketing tools की भौंडी नकल मात्र लगती है जिसका एक ही उद्देश्य है किस प्रकार राजस्व को बढ़ाया जाये।पहले फिल्म बनाते हैं,फिर merchandise निकाले जाते हैं,गेम भी आते है,उसके बाद ना जाने क्या।

Zaheer said...

बहुत-बहुत धन्यवाद् प्रभास भाई ।

Zaheer said...

उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया नहलावत भाई ।

Zaheer said...

धन्यवाद आशीष भाई । कॉमिक्स भी जल्दी ही आएंगी ।

Zaheer said...

Thanks SB for warm wishes.Well, you are right that due to time factor and other preferences of life, blogging has certainly took a back seat.Moreover, though the blog originated as comic sharing site it eventually developed into a platform where we like minded comic/mags/novels lovers can discuss and share our meaningful thoughts and creative ideas.
I have no hesitation to accept that some of the best post of this blog have germinated from the ongoing discussions between dedicated and passionate comic lovers like you, Kuldeep Jain bhai and others.
I have mentioned quite a few times that I need a catalyst for enhancing the chemical reactions in me which results in generation of a thoughtful and meaningful post(s) and earlier that catalyst roles were played by meaningful,dedicated and passionate comments vibrating with energy and ideas from Kuldeep Jain,you and others which unfortunately have dried a bit same as my passion to share the thoughts and ideas have dried a bit but still very much alive.
I also hope to see that time coming back though not in that frequency but having the same vigour which it earlier used to have.

Zaheer said...

Thanks Vidhyadhar bhai.

Zaheer said...

शुक्रिया पराग भाई । मैं आपसे सहमत हूँ कि जीवन में बढ़ती ज़रूरियात के चलते समय सिकुड़ता जा रहा है और ब्लॉगिंग में मंदी भी उसी का ही असर है । मैं आपकी इस बात से भाई सहमत हूँ कि एक सफ़ल फ़िल्म पर कॉमिक इत्यादि निकालना भी उसकी लोकप्रियता को भुनाने मात्र की क़वायद भर है । अब जहाँ तक बात है शोले फ़िल्म पर निकाली गयी इन कॉमिक्स की तो भले ही यह शोले की सफ़लता को भुनाने की एक और कोशिश मात्र हो लेकिन इसमें कोई शुबहा नहीं है यह कॉमिक्स भी किसी कम स्तर की नहीं हैं । इन कॉमिक्स की आर्ट, प्रिंटिंग और कहानी पर मेहनत की गयी है जोकि इन्हे रोचक और पठनीय बनाती है । अगर यह शोले फ़िल्म से सम्बंधित न होती तो भी पढ़ने लायक तो होती ही लेकिन चूँकि यह शोले से सम्बंधित है इसीलिए यह संग्रह लायक भी हैं उन फ़िल्म प्रेमियों के लिए जिन्हे शोले ने हद से ज्य़ादा मुतास्सिर किया है ।

AJAY said...

Hello Zaheer ! Congrats on blog's Anniversary . Your posting of comics has become like posting on Anniversary celebrating your marriage Anniversary without enjoying your married life whole year . Just take a some time to share gems available with you , we would enjoy these too. Sholay was indeed a very nice movie , no other movie can match that still todate .

Hope your future Anniversary post will be some sharing too as blogs are now international so persons who have not seen Sholay will be deprived of other gems

Zaheer said...

Thanks Ajay.Well,I agree with you that frequency of posts at this blog has been reduced considerably because posting mere comic links was never been motto of the blog without any dedicated and serious discussion over it.I shall try to come up with comics as well as some discussion also in near future.

kuldeepjain said...

Hi JAheer

my greetings for completing 7 years of comic world.

i am sorry for being so late to show my presence but 4th Feb i started from Delhi and then as i reached here on 7th Feb busy with lots of daily work which includes hassle in the job as well.

will catch you soon..

Kuldeep

Chandan said...

Saat saal poore hone ki bhout bhout bhadhai Sir ji,

Zaheer said...

Thanks Chandan.

Sazz said...

Zaheer Bhai... I was amazed to see your collection of comics. I am also a Indrajal Fan. Now we dont get to see any of these. Congrats Brother.

akfunworld said...

Very heartily congratulations on completing 7 amazing years in the blogging universe Zaheer Bhai. And please forgive me for coming late on this celebration of your amazing achievement.
As some people already mentioned in their comments about your lesser presence at here in last year, i am to very angry (I hope you don't mind me using this word, which is used with a lot of love and affection) with you for not writing as much as you used too. I mean there was a time when i was regular visiter of your blog to find out what new gem you are presenting to us, but now it has became so rare to find your presence here which is sad. I mean as i had earlier told you that you are the inspiration for me to start my own blog and writing, sometime i miss someone who can give me suggestions and tell me what and where to improve.
Brother i can just request you to be more active here, and hope to see some more amazing posts from you.
As far as this post is concerned. I agree with you that it is a great thing to publish a comics based on 'Sholay'. After watching the movie in 3D it is just 'Sone pe Suhaga'. But what made me more happy is the second comics which tells the making of Gabbar Sing as a ruthless Daku. It works as a prequel and gives the movie lovers like us a more distinct idea about Gabbar Singh because if you see there was a background story for every main character like how Thakur the biggest enemy of Gabbar? The Widdow Bahu? Jay and Viru? But there was nothing about Gabbar, and i always felt that they should have shown something about Gabbar's background too, and now they did that. Now they have really completed Sholay in my opinion.
Hope to see something new from you very soon and once more a big congratulation.

Venkitachalam Subramanian said...

Zaheer, congrats on your 7 years of blogging.

Maybe a poetic megapost on the fiftieth anniversary of IJC is next, sometime this month?

DINAS said...

hi can u please share if u have any inspector azad comics?

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