Sunday, March 10, 2013

# अंक 339 -"विद्रोही दानव" - "हज्ज की प्रेम कहानी"



सर्वप्रथम तो आप सभी पाठकों को कॉमिक वर्ल्ड की तरफ से 'महाशिवरात्रि' पर्व की बहुत बहुत बधाई ! और इस महापर्व को मनाने कॉमिक वर्ल्ड पर पधारें हैं दो महानायक ! एक तो है महाबली वेताल और दूसरा है जो  चट्टानों को चूर चूर कर दे , स्वाभाव से बिलकुल शांत, पर अगर बिगड़ जाये तो प्रलय ला दे , तब इसे इसके सिवा कोई दूसरा नहीं रोक सकता ! क्या आप  अब भी नहीं समझे  की यह कौन है  ? अरे भाई ऐसा सीधा साधा मगर ब्रहमास्त्र से भी ज्यादा विनाशक इसके सिवा दूसरा कोई और हो ही नहीं सकता ! अब तो इसका नाम ही कानों में घन्टों के माफिक बजने लगा है
                                                              हज्ज हज्ज हज्ज
वेताल की जिस भी कहानी में  हज्ज आया , मानो जलजला ही आ गया ! मैं तो जब भी हज्ज की कहानी पढ़ता हूँ तो मुझे यह कभी भी महसूस ही नहीं हुआ की मैं कोई वेताल कथा पढ़ रहा हूँ क्योंकि हज्ज की हर कहानी में वेताल की भूमिका एक 'सहायक' की भूमिका से ज्यादा नहीं होती ! शुरू से लेकर अंत तक बस हज्ज ही हज्ज ! हर कहानी में वेताल की शख्सियत हज्ज की पहाड़नुमा शख्सियत से टकराकर हज्ज के साए के आस पास ही सिमट कर रह जाती है So  Ladies & Gentlemen,once again Eighth Wonder of the World, 

                                                               Hzz
                                                              Is Back
                                                              In & As

   Beast Unleashed in a dynamic, thrilling & explosive Love Story


वेताल हज्ज को कुहाँसा पर्वत की गुफाओं से अपने मित्र द्वीप मैं ले कर आया (वेताल इन गुफाओं से हज्ज को कैसे लाया इसकी एक अलग कहानी है जिसे मैं  "हज्ज स्पेशल सीरीज " के अन्तर्गत कॉमिक वर्ल्ड पर ही पेश करूँगा) 'विद्रोही दानव' सन्डे स्ट्रिप न 106 "Hzz & Harzz " से ली गयी है , और इसका हिंदी रूपांतरण बहुत ही जबरदस्त है !

आप को जानकर आश्चर्य होगा की हज्ज की विलक्षण ताकत का राज है "गुच्छी" खाना ! चौंक गए न आप ! आप ही नहीं चौंके , नीचे चित्र में देखिये की कैसे बाघ की आँखें भी हैरानी से हज्ज को गुच्छी खाता देख रही हैं ! अब बाघ भी सोचता होगा की मैं इतना मांस खाता  हूँ पर शक्ति का प्रतीक हज्ज है ! अब घोडा / हाथी भी शाकाहारी हैं लेकिन इनकी शक्ति का कोई मुकाबला नहीं है , तो दोस्तों हमें भी हज्ज की भांति शाकाहार भोजन करना है और ताकतवर बनना है :)

आप सभी को याद होगा हज्ज वेताल के शादी समारोह में भी सम्मिलित हुआ था और तब डायना की मम्मी तो डर ही गयी हज्ज को देख कर ! और बोली "यह है क्या ? कहीं मुझे ही गुच्छी समझ कर ना खा ले " हा हा हा हा
अरे मम्मी जी हमारा हज्ज तो बहुत ही शांत स्वाभाव का है बशर्ते की कोई इसे गुस्सा ना दिलाये !!!


क्या नाचा था हज्ज,  वेताल-डायना की शादी पर ! देखिये जरा 


 मम्मी जी , हमारा हज्ज  इंसानी मनोभावों  को अच्छी तरह समझता है , क्या आपको याद नहीं जब आप डायना को विदा करने के बाद रोने लगी थी तो हज्ज नें आपको कैसे चुप करवाया था !



प्यार की भाषा भी हज्ज बखूबी समझता है ! सारे मित्र द्वीप में से हज्ज "डायना" का चहेता है !   पुच्ची ...  क्या किस्मत पाई है हज्ज भाई !  :(....
कैसे चिड़ाते हुए से हंस रहे हो हज्ज भाई और यहाँ यह सब  देख कर  दिल  स्वाहा  होने को  है  :-(...........


दोस्तों ,  हज्ज और गंजू गुरिल्ले में से कौन ज्यादा शक्तिशाली है ? 


वेताल की माने तो गंजू गुरिल्ला अपनी कद काठी के हिसाब से ज्यादा शक्तिशाली है ! बेशक गंजू गुरिल्ला बेहद भारी भरकम एवं अत्यंत शक्तिशाली है  ! लेकिन अगर हज्ज को गुस्सा आ जाये तो ज्वालामुखी भी फट जाये ! देखते हैं , आगे क्या होता है !


उड्डी बाबा ! यह हज्ज को क्या हो गया यकायक ! हज्ज नें तो पूरा पेड़ ही जड़ से उखाड़ लिया और तो और उसे तिनके की तरह तोड़ भी दिया !!!  हज्ज भाई , क्या यह शक्ति प्रदर्शन है या कुछ और !  क्या आपको हज्ज के इरादे नेक लगते हैं ? देखते हैं !


नहीं दोस्तों , यह कोई शक्ति प्रदर्शन नहीं है , हज्ज तो अपने दोस्तों पर ही प्रहार कर रहा है ! यहाँ तक की अपने प्रिय मित्र स्टैगी पर भी ! लगता है प्रलय की शुरुयात हो चुकी है !


अब  आप  ही बताएं की जंगल का राजा  कौन है ? यह सिंह या फिर रौद्र रूप में आया हज्ज ! अब बेचारे इन बब्बर शेरों को कौन सदबुद्धि दे कि अब हज्ज को  सिवाए हज्ज के कोई और नहीं रोक सकता !!


लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है की हज्ज बिलकुल नाक की सीध में ही चला जा रहा है , अब इस सीधे रास्ते में जो भी आएगा , उसका नामोनिशान ही मिट जायेगा ! अब हज्ज के रास्ते में आ गयी है खतरनाक पिरान्हा मछलियों से भरी नदी जो चंद मिनटों में हाथी का भी सफाया कर दे , लेकिन हज्ज पर पता नहीं कौन सा जनून सवार है की उसने अब इस नदी को भी पार करने का फैसला कर लिया है ! भाई जब कोई अपने प्राणों की भी परवाह ना करे और हर मुश्किल से मुश्किल चुनोती का सामना करने के लिए भी तैयार हो , ऐसा तो तभी होता है जब किसी को किसी से प्यार हो जाए ! तो क्या हमारे हज्ज का भी यह हाल है ? फिलहाल तो पिरान्हा मछलियों का हाल चाल पूछते हैं जिनके आरी से भी तीखे दांत भुट्टे के दानों की तरह टूट कर गिर रहे हैं ! वाह रे हज्ज ! तेरी महिमा अपरम्पार है :)
"आजा ..हो ..आजा ..मेरे दिल नें तड़प के जब नाम तेरा पुकारा ..."   अरे यह खरखराती  सी  आवाज में कौन किसे पुकार रहा है ?  क्या आपने सुनी यह पुकार  ? और हमारा हज्ज भी इसी मधुर आवाज की तरफ ही आंधी तूफान की तरह बड़ा चला जा रहा है !!

























हज्ज भाई , आपकी नाक की सीध मैं जो आया उसे आपने अपने रस्ते से हटा दिया ! मान लीजिये की अब इस रस्ते में कोई बसा बसाया कबीला ही आ जाये तो क्या आप अपना रास्ता बदल दोगे क्या ? लो हम बात ही कर रहे थे की कबीला आ गया हज्ज के रास्ते में ! अरे यह क्या ! हज्ज नें तो कबीले को भी तहस नहस करना शुरू दिया (ज्ञात रहे की  यह तबाही सिर्फ  नाक की  सीध के रास्ते तक ही सीमित है ) लेकिन मैं बहुत ही उलझन में हूँ की यह नाक की सीध के रास्ते का क्या चक्कर है ! पता नहीं कौन है इस सीधे रास्ते के उस पार ? वेताल को भी वक़्त रहते हज्ज की शादी करवा देनी चाहिए थी , वर्ना हज्ज आज यूँ मस्त हाथी की तरह  भटकता ना फिरता :) पर वेताल भी हज्ज के लिए दुल्हन भला कहाँ से खोजता ? खैर देखते हैं ऊपर वाले नें हज्ज की किस्मत में क्या लिखा है !

      









मगर इस कहानी के "सह-अभिनेता" यानि की 'सहायक' उर्फ़ वेताल किधर हैं अब तक ? लीजिए यह रहे वेताल जो इस कहानी के मुख्य नायक यानि की  हज्ज द्वारा छोड़े गए तबाही के नक़्शे पर उसका पीछा कर रहे हैं !


यह 'सीधे साधी' वाली बात कुछ हज़म नहीं हुई 'ओ चलते फिरते प्रेत' ! (गडब ) :(


हज्ज के पद चिन्हों का पीछा करते करते वेताल के कदम उसी गुफा पर आकर रुक जाते हैं जहाँ से उसे यह प्रलयंकारी हज्ज मिला था !


भाई एक बात तो मैं आज मान गया की जंगल वाले सही कहते हैं की "वेताल अपने पीछे की और भी देख लेता है " देखिये कैसे वेताल नें तपाक से बोला की "हज्ज बाहर आ जाओ " क्या स्टाइल मारा है वेताल भाई आपने  ! जरा अब देखिये इस कहानी का रोमांचकारी मोड़ ; महानायक और सह नायक आमने सामने ! हज्ज के तेवर अब भी कुछ ठीक नहीं लग रहे ,वेताल के चेहरे पर खीची चिंता की लकीरें यह साफ़ बयाँ कर रही हैं ! देखते हैं आगे क्या होता है !


 मगर हज्ज तो वेताल को कुछ दिखाने का इच्छुक है ! वेताल भी फ़ौरन हज्ज के पीछे भागता है यह पता करने के लिए की हज्ज का नाक की सीध में आने का क्या रहस्य है ?



तो मेहरबान , साहेबान , कद्रदान , हमारे हज्ज को प्यार हो गया है ! " दिल क्या करे जब हज्ज को हर्ज्ज़ से प्यार हो जाये ..... उसने अपने जीवन साथी की गंध को इतने  मीलों की दुरी से ही सूंघ लिया और उस गंध का पीछा करते करते नाक की सीध के रास्ते जो भी आया , उसे अपने रस्ते से हटाता चला गया और अपने प्यार को आखिरकार खोज ही लिया ! वेताल भी आश्चर्यचकित है मादा हज्ज को देख कर !



जरा हज्ज के चेहरे पर आई आतमसंतुष्टि के हाव भाव देखिये ! कैसे सीना तान के अपनी महबूबा "हर्ज्ज़" को गले लगाये हुए है ! अरे अरे अरे ! "हर्ज्ज़" तो वेताल को देख कर शर्माते हुए हज्ज के विशालकाए सीने में ही छुपे जा रही है !      लगता है हर्ज्ज़ मन ही मन गा रही है  "आ के तेरी बाँहों में ... हर शाम लगे सिंदूरी ..." क्या रूमानी पल हैं यह !


अरे हर्ज्ज़ नें तो  दोस्ती का हाथ बड़ा दिया ,  अब जरा वेताल का हाथ मिलाने का शाहाना अंदाज देखिये ! अपनी कमर पर हाथ रख कर जैसे कोई रौबदार व्यक्तित्व का स्वामी अपनी भारी भरकम आवाज़ में कहता है "Hello Miss ....."


वेताल नें दोनों को इशारे से  मित्र द्वीप में वापस आने का न्योता दे दिया , अरे वाह ! हर्ज्ज़ तो बिलकुल किसी सुपर मॉडल की भांति पोज बना कर खड़ी है ! ह्म्म्म ...हज्ज पर छाये पागलपन का राज अब समझ में आ रहा है !
हज्ज भी मन ही मन में गुनगना रहा लगता है    "वो दीवानापन , वो मासूमियत, अदाएं भी हैं ...मेरी प्यारी हर्ज्ज़  में ":)भाई यह तो मानना पड़ेगा की हर्ज्ज़ में 'अदाएं' तो बखूबी हैं !! :) 

एंह एंह यह तो  हमारी शर्मीली हर्ज्ज़ गा रही है हज्ज के लिए "भूल गयी सब कुछ ..याद नहीं अब कुछ ..हो हो हं हं . एक यही बात ना भूली ....हज्ज  ,,,ओ ओ   ..Hzz I Love you"
 

लेकिन इस सारे घटनाक्रम के बाद वेताल ऐसा  नॉन स्टॉप  हंसा की बस ऐसी हंसी वेताल की पहले कभी नहीं देखी ! मित्र द्वीप में पहुँचने से पहले सारे रास्ते वेताल बस हँसता ही रहा ! यहाँ तक की जंगली जानवर भी हतप्रभ हैं वेताल को इस कदर हँसता देख कर ! मैंने तो खुद किसी कहानी में वेताल को इतना देर तक हँसते नहीं देखा !


हा हा हा हा और कबीले  वालों को तो दोहरी हैरानी हो रही है , एक तो वेताल ऐसे हँसता देख कर और दूसरा हज्ज और हर्ज्ज़ को देख कर ! एक ही हज्ज से वो अब तक खौफजदा हैं और दो दो को देख कर तो इनकी  सिट्टी पिट्टी गुम हो रही है !
हर्ज्ज़ तो हज्ज को  एक के बाद एक प्रेम गीत सुना रही है  ... "तेरे बिना जिया जाये ना ..ओ हज्ज ओ हज्ज ...बिन तेरे एक दिन साजना ...सांसों में साँस आये ना ... ओ ओ.. भाई यह दोनों तो अपनी दुनिया में खो चुके हैं अब !


दोस्तों , गुफा से लेकर मित्र द्वीप तक का रास्ता तो लम्बा है , जब तक वेताल हज्ज और हर्ज्ज़ को लेकर मित्र द्वीप तक पहुँचता है , मैं आप सबको को उस सवाल पर ले चलता हूँ जो वेताल के मन में उमड़ा है इस पूरे घटनाक्रम के बाद ! और वो सवाल यह रहा :

                            "आदमी पगला क्यों जाता है , स्त्री के आकर्षण से "?

इस संवाद का हिंदी रूपांतरण बहुत ही बढ़िया किया गया है , पूरी कहानी को और भी  रूमानी रंग में रंग देता है
क्या आपको इसका मतलब समझ में आता है "CHARCHEZ LA FEMME " :( ??? नहीं ना !मैंने भी "चलते फिरते शबदकोश" उर्फ़ कॉमिक भाई से पूछा तो पता चला की यह एक French शब्द है !!) तभी तो हिंदी में पढ़ने का मजा ही कुछ और है :)

वेताल भाई , आप तो एक ऐसे सवाल में फंस गए हो जो एक अनसुलझे रहस्य की तरह ही है ! लेकिन मैं और कॉमिक भाई आपको इस सवाल की च्क्रघिन्नी से बाहर निकालने की पूरी कोशिश करेंगे !  वेताल भाई आपके इस सवाल में ही इसका जवाब छुपा है ! इस सवाल का जवाब है 
"स्त्री में ऐसा एक चुम्बकीय आकर्षण होता है  की आदमी  अपनी सुध बुद्ध खो  कर बस खिंचा चला आता है और तब इस मोहपाश से  बच पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है  "
इस के सम्बन्ध में मैं दो ऐसे तथ्य पेश करूँगा की जिसके बाद यह 'सवाल' खुद ब खुद ही 'जवाब' बन जायेगा !!
 वेताल भाई , आपको याद होगा की 'जंगल गश्ती दल' की स्थापना जो आपके पुरखे 12 वें वेताल नें की थी , उस दौरान वेताल और लाल दाढ़ी वाले के बीच में भीषण युद्ध हुआ था तो उस दौरान लड़ते लड़ते वेताल की नजर एक खुबसूरत लड़की पर जा टिकती है , 12 वें वेताल की गर्दन भी कट सकती थी लेकिन वेताल को इसका कोई अफ़सोस नहीं था!!  ऐसा चुम्बकीय आकर्षण था उस लड़की की आंखों में ! "पहली नजर नें कैसा जादू कर दिया ......"

 ज़हीर भाई नें इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी सुलगती कलम से एक बहुत ही मदहोश कर देने वाली एक पोस्ट लिखी थी "JUNGLE PATROL" ज़हीर भाई की इस पोस्ट से मैंने कुछ सुलगते अंगारे लिए हैं ! जरा गौर फरमाए :


"...........ज़रा गौर कीजिये १२वे वेताल की आशिकमिजाज़ी की,जनाब अपने जीवन की बाज़ी लगाकर दुश्मन के गढ़ में घुसकर लड़ रहे हैं और एक हसीना पर नज़र पड़ते ही सुधबुध खो बैठते हैं..वाह,क्या बात है..और तो और वो अपनी इस हरकत की क्या वजह बताते हैं ज़रा देखिये..."
"SHE WAS A BEAUTY-WELL WORTH THE LOSS OF A SWORD!"
"..तो पढ़ा आपने की क्या कहा वेताल ने की "वो लड़की थी ही इतनी सुन्दर की उसपर तलवार न्योछावर कर मैंने कोई गलती नहीं की"..वाह,वाह...क्या खूब!!"

तो वेताल भाई , अगर 12 वां वेताल पगला सकता है वो भी जंग के मैदान में , एक हसीना की झलक मात्र से तो हज्ज क्यों नहीं ! 

वेताल भाई , आपके जनक स्वर्गीय श्री ली फाक साब  भारतीय सभ्यता और संस्कृति से बहुत प्रभावित थे , अब में जो तथ्य आपके सामने रख रहा हूँ उससे यह बात बिलकुल शीशे की भांति  साफ़ हो जाती है की वाकिए आदमी पगला जाता है औरत  के चुम्बकीय आकर्षण के वशीभूत हो कर !
ऋषि विश्वामित्र जब बहुत ही घोर तपस्या में लीन थे तो देवताओं नें उनकी तपस्या भंग करने के लिए मेनका नामक अप्सरा को धरती पर भेजा ,और मेनका नें भी अपनी अदाओं की तरकश से दो- तीन ऐसे प्रेम बाण बरसाए कि विश्वामित्र को आँखें खोलनी ही पड़ी ! देखिये चित्र में :) 

भाई मुझे यह तो नहीं पता की यह शानदार  पेंटिंग्स किस कलाकार नें बनायीं , लेकिन अगर मेनका इतनी ही  खुबसूरत थी जैसे की चित्रकार नें दिखलाया है तो मुझे यह कहने में कोई हिचकचाहट नहीं की विश्वामित्र नें आँखें खोल कर कोई गलती नहीं की !! :)

और अब इन्हें देखने के बाद तो वेताल भाई आपका 'सवाल' जरुर 'जवाब' में तब्दील हो जायेगा ! यह हैं बॉलीवुड की 'मेनका' यानि की "Marvellous Madhubala" जिनके बारे  में हमारे कॉमिक भाईसाब नें तो यह तक लिख दिया :
     "दोस्तों अगर जन्नत की हूरें मधुबाला सरीखी होती होंगी तो कमबख्त मौत से डर कैसा!!"

तो वेताल भाई , आशा करता हूँ की मधुबाला को देखने को बाद तो आप भी ....अं अं ए ए ...है ना .  है ना :)  ! मुझे पता था ! अब तो शक की कोई गुंजाईश ही नहीं रह जाएगी ! आपको आपकी 'क्यों' का जवाब अब तो मिल ही गया होगा  ,  आप हम सब के बचपन से लेकर अबतक  चहेते हीरो रहे हो तो क्या मेरा फ़र्ज़ नहीं बनता था की अपने हीरो के इस सवाल को सुलझाने में कुछ मदद करता  !

लो दोस्तों , बातें करते करते कब मित्र द्वीप आ गया पता ही नहीं चला ! जरा हर्ज्ज़ के बेठने के अंदाज को  तो देखिये ! लग रही है न जलपरी ! 
"ले तो आये हो हमें सपनों के गाँव में , प्यार की छाँव में बेठाए रखना .. सज्जना ..ओ .. सजना "

अब वेताल नें पहले ही हज्ज को आगाह कर दिया की पता नहीं उसके मित्र उसके साथ कैसे पेश आयें , क्योंकि हज्ज सबकी धुलाई जो कर के गया था !


 लेकिन हज्ज अब तक जलपरी सी हर्ज्ज़ का साथ पा कर धन्य हो चूका था और शांत भी ! और उसने अब अपने तरीके से बेहद भोलेपन में अपने सभी दोस्तों से नीचे लेट कर माफ़ी मांगी ! और सभी नें उसे माफ़ भी कर दिया (और कोई चारा भी नहीं , माफ़ी देने के सिवाए , सब को डर है की कहीं फिर से यह हज्ज भड़क गया तो ...:) पर अब चिंता की कोई बात नहीं हर्ज्ज़ जो है , बस आप सब उसे खुश रखो तो हज्ज खुश ही रहेगा


तो दोस्तों, कहानी का तो अंत हो गया है मगर यह शुरुयात है "हज्ज और हर्ज्ज़" के सच्चे प्रेम के अंतहीन सफ़र की ...........देखिये कैसे गुनगना रहे दोनों ."चलते चलते ...मेरे यह गीत याद रखना , कभी अलविदा न कहना .. ओ हर्ज्ज़ .............कभी अलविदा न कहना .. ओ हर्ज्ज़  .......अरे कभी नहीं कहूँगी रे बाबा ...:)"
हज्ज और हर्ज्ज़ तो गए अपने 'हनीमून' पर ! आप दोनों को सुख:मय वैवाहिक जीवन की बहुत बहुत बधाईयां !


ह्म्म्फ़ .. हज्ज की पोस्ट भी .. ह्म्म्फ़ ..हज्ज की तरह विशालकाए हो जाती है ..ह्म्म्फ़
अरे यह 'लिंक' किधर गया ? :(  मैं तो लिंक अपने साथ लाया था प्लेट में सजाकर  ! 
ह्म्म्म ...लगता है हज्ज नें जो उथल पुथल मचाई , उस दौरान इस कहानी का 'लिंक' भी किसी शब्द में "अटक " गया लगता है ! अब यह लिंक किस शब्द में अटका है , इसके लिए दोस्तों आपको थोड़ी सी मेहनत करनी पड़ेगी ! इसका लिंक पक्का किसी शब्द में ही  है  :) लिंक शायद चोटी पर अटक  गया :( , नहीं नहीं शायद थोडा नीचे रह गया :) यहाँ भी नहीं ,
 अरे बाप रे ! यहाँ  तो लिंक्स का  महा - मक्कडजाल  फैला हुआ है :(  अमा यार यह तो links की भूलभूलईया सी लग रही है !!   तो लेकर भोले भंडारी का नाम , आओ चलते हैं इस अनोखी "भूलभूलईया" के अन्दर  :)
                 
  नोट : लिंक मिलने पर कृपया आप comments में जाकर लिंक का पता और लिंक देने का कष्ट कदापि  ना करें ! धन्यवाद                                                                  
हर हर महादेव 

51 comments:

Raj Joshi said...

Very nice Comics...and matching presentation...You Rule!

Vijay Kumar Sappatti said...

मज़ा आ गया .. बहुत समय पहले पढ़ी थी ये कॉमिक.

VISHAL said...

@Raj Joshi
Joshi Saab, thanks for your kind visit. You always come forward to appreciate Hindi IJC bloggers ! Every "Mute & Hidden Downloader" should learn from you a lot !

VISHAL said...

@Vijay Kumar Sappati

विजय जी , मुझे बहुत ख़ुशी हुई आपको बहुत समय पीछे ले जाकर :)
और हाँ , विजय कुमार जी , भाई आप 'डाकू पान सिंह ' और 'सुपारी लाल' की ड्राइंग बहुत ही लाजवाब बनाते हो , बिलकुल एक मंझे हुए कलाकार के जैसे !

VISHAL said...

@ Mohd. Kasim

कासिम भाई , आपका यहाँ पर हार्दिक स्वागत है ! लेकिन कासिम भाई , comments में जाकर 'लिंक' का पता और 'लिंक' देना क्या उच्चित है ?
भाई , यह लिंक आप सभी के लिए ही है , जिसे चाहिए होगी वो अपने आप पोस्ट में से खोज लेगा ! इस पोस्ट को बनाने में घंटों लगें हैं ! अगर आप द्वारा से टिपण्णी करना चाहते हैं तो आपका दिल के सभी दरवाजे खोल कर स्वागत है , पर ज्ञात रहे लिंक देने का कष्ट मत कीजियेगा !
धन्यवाद

Comic World said...

विशाल भाई आपकी एक और मदहोश करने वाली पोस्ट से वाबस्तगी हुई । भई कमाल है ! आपकी पोस्ट्स का प्रस्तुतीकरण बहुत शाहाना और बहुत जज़्बाती होता है जो सिर्फ वही इंसान प्रस्तुत कर सकता है जिसने इन कॉमिक्स को न सिर्फ़ पढ़ा हो बल्कि अपनी साँसों में इन कहानियों को बसा लिया हो,अपनी आत्मा में इन कहानियों को आत्मसात कर लिया हो ।
हज्ज़ के कारनामे हमेशा कमाल के होते हैं जिसमे किसी दुसरे के लिए कोई गुंजाईश नहीं होती है और मौजूदा कहानी भी कोई अपवाद नहीं है जिसमे वेताल की भूमिका मात्र किसी सूत्रधार की या किसी रहबर की है जो कहानी की अँधेरी गुफ़ा में मशाल लेकर पाठकों के आगे-आगे चल रहा हो ।
यह बात मैं और आप अच्छी तरह से जानते हैं कि हमारा मकसद मात्र इस कॉमिक का डाऊनलोड लिंक पेश करना नहीं है बल्कि इन कहानियों पर दिल से परिचर्चा और तब्सिरा करना है जसकी वजह से हमारे दिलों में छप चुकी इन कहानियों की उठती हुई खलिश मिटाई जा सके ।

Raj Joshi said...

I still remember Vishal Bhai's post for 'Gufa Daitya Ka Apaharan'. And not this unmatched presentation....I would say..Vishal Bhai has established himself as Huzz in Hindi IJC world...
His presentation and story telling is liek a Martha in the hazel glen....Mesmerises every Hindi IJC readers...Comrade ko Lal salam!

Raj Joshi said...

Typo a little..
And NOW this unmatched presentation

Rajesh Kumar said...

So Tough....
Still Didn't found the link

मोहम्मद कासिम said...

Hi Vishal Bhai

Mujhe nahi paata tha link comment me nahi likhna hai. mujhe laga link khojne ki quiz hai :-)

sory for that.

VISHAL said...

@ CW
"वेताल की भूमिका मात्र किसी सूत्रधार की या किसी रहबर की है जो कहानी की अँधेरी गुफ़ा में मशाल लेकर पाठकों के आगे-आगे चल रहा हो ।"
अति उत्तम कॉमिक भाई ! वेताल की इस कहानी में भूमिका को आपने क्या जोरदार तरीके से व्यक्त किया है 'पाठकों के आगे अँधेरी गुफा में आगे चलना' क्या बात है ! 'रहबर' 'खलिश'... आपके इन्ही अल्फाजों के तो हम सब कायल है ! "क्या सॉलिड लिखते हो भाई .." :)

VISHAL said...

@ Raj Joshi

'Gracias Amigo'यानि की धन्यवाद धन्यवाद ! यानि की मुझे आपका यह लिखा हुआ शब्द बहुत ही दिलकश लगा जोशी साब ! ऐसे दो चार शब्दों से और रूबरू कराइये जनाब !

VISHAL said...

@ Mohd.Kasim

कासिम भाई , मुयाफी मांग कर मुझे शर्मिंदा मत कीजिये , कभी कभी ऐसा हो जाता है ,
दरअसल ,मैंने इस पोस्ट पर धंटों लगाये हैं और डाउनलोडर के पास एक शब्द लिखने का भी समय नहीं है !

VISHAL said...

@ Rajesh Kumar

Glad to meet you! Dear give here your email id , I will tell you which link to click !

VM said...

Bahut Khojo Sir par Nahi mila link

VM said...

Bahut Khoja Sir par nahi mila Link

VISHAL said...

@ VM

Don't Worry Dear VM ! Just write down your name and email here' Mighty Hzz will be yours!
"वो हज्ज ही क्या जो आसानी से मिल जाये" :)

Gaurav Gandher said...

Thanks a lot Vishal bro for this one and also the way you've presented it. Liked it a lot. Took a bit of time to find the link but found it without any problem. Will wait for more from your side

VISHAL said...

@Gaurav Gandher

एक विख्यात Uploader होते हुए भी आप हौसला अफजाई से कभी पीछे नहीं हटते बल्कि सदैव अग्रणी रहते हो , आपके व्यक्तित्व की यह बात मुझे बहुत अच्छी लगती है , आपकी स्कैनिंग और एडिटिंग के तो क्या कहने ! दुर्लभ और गुमनाम कॉमिक्स पोस्ट करने में तो आपको विशेष महारत हासिल है ! सच में गौरव भाई , आपने कुछ एक तो ऐसी कॉमिक्स पोस्ट की हैं जिनका तो मैंने पहले कभी नाम तक भी नहीं सुना था !
आपको यह पोस्ट एवं इसका प्रस्तुतीकरण पसंद आया , यह जानकर बेहद सुखद अनुभूति हुई :)

Rajesh Kumar said...

Vishal Bhai,
Thanks a lot for replying. First of all I would like to thank you and all the similar bloggers for doing so many efforts for uploading these rare and rarest comics who brought back the sweet memories of our childhood. Today I searched also a lot for the link and still failed to find that one. Rajesh Kumar. ptraj2000@gmail.com

Riddhima Mallik said...

bhaut khoja lekin link nahi mila pls link send kariye.
mera email address hai rajeshsonijdr@yahoo.com
with regards
Rajesh Soni

VISHAL said...

@ Rajesh Kumar and Rajesh Soni

आप दोनों को "ख़ुफ़िया लिंक" का रास्ता मैंने बता दिया है ! हज्ज और हर्ज्ज़ का ख्याल रखिएगा :)

Raj Joshi said...

Muchas gracias mi amigo! usted es uno de la gema.
Tú eres el Rey de IJC Khan Hindi!

Bahut Dhanyavad mere dost! Aap to Ek sitara hain.
Aap Hindi IJC Ke King Khan hain!

VM said...

Sir My Name Vishnu Modi My E Mail -
vishnumodi82@gmail.com

VM said...

Thank u Sir

Nagesh said...

nahi mila bhai nagesh03@gmail.com

VISHAL said...

दोस्तो , इसका लिंक पोस्ट में ही है , थोडा सा मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं है इसे खोजना !
बहरहाल , जिन्होंने कोशिश की , मगर सफल नहीं हो पाए , मैंने सभी को किस लिंक पर क्लिक करना है , बता दिया है

धन्यवाद

rajesh soni said...

Thanks Sir,Ab nayi comics ka intjar rahega.Meri request he ki indrajal comics no.145 LUAGA KA GUPT ABHIYAN upload kare.With regards;Rajesh Soni,Jodhpur(Raj)

Rajan Malvankar said...

Nice post
Searching three days for link but not found
please send link
truptirajan@gmail.com

Rajan Malvankar said...

धन्यवाद!
लिंक बद्दल.
ही एक चांगली कल्पना होती.
तीन दिवस संपूर्ण शोधुनही मिळत नव्हती.
असेच नवीन नवीन कल्पना शोधत रहा.
पुन्हा एकदा धन्यवाद

VISHAL said...

@Rajesh Soni

सोनी जी , आपने जोधपुर से आकर 'कॉमिक वर्ल्ड' को राजस्थान की मिट्टी की सोंधी सोंधी खुश्बू से महका दिया है ! आपसे मिलकर बेहद ख़ुशी हुई :)

VISHAL said...

@ Rajan Malvankar

राजन जी , आपने मीठी सी मराठी भाषा में अपने विचार व्यक्त करके मेरा मन मोह लिया ! आप सावंतवाडी से हो , जो की लकड़ी के खिलोने बनाने में बहुत विख्यात है ! जब भी मुझे किसी मेले में जाने का अवसर मिलता है तो मैं वहां से दो चार लकड़ी के खिलोने लेने से आज भी नहीं चूकता :)

Nagesh said...

"राज को राज रहने दो"............ Thanks Vishal Bhai Is comics k liye sath hi sath comics se v majedar aap k shabdon k liye

Kavindar Farswan said...

Very good Blog....enjoyed very much.... remembering old days of 80's.....most favorite comics of Phantom and Mandrak....Thanks a lot to the blogger of this Blog ...kavindar farswan

aditya M said...


ye kya likh dala hai vishal bhaiya

pakka filmi maleria ke lakshan hai sach men


mazaa aagaya

zaheer bhai ke post par aisa tadka !!!

shandar kahani
sundar lekhni

is ke upar zaheer sahab ka urdu translation bhi mil jaye to waah


link embed karne wala system samajh nahi

kripya madad karen

VISHAL said...

आदित्य जी

आपके प्यार भरे शब्दों का तहे दिल से शुक्रिया , आप सिर्फ अपना ईमेल आई डी बता दीजिये , कौन से लिंक पर क्लिक करना है , मैं आपको बता दूंगा
आपने इतना कुछ लिखा , पड़कर बेहद अच्छा लगा , जबकि ज्यादातर के पास तो 'एक शब्द' तक लिखने का समय नहीं होता !

anuraag said...

भाई जी , मज़ा आ गया पढ़कर , पर लिंक फिर भी नही खोज पाया ,कृपया मदद करे,,
anuraagmisra12@gmail.com

anuraag said...

धन्यवाद विशाल भाई , कॉमिक्स बहुत ही बढ़िया थी, आप की अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा , एक बार फिर से धन्यवाद,,

praveen said...

Wonderful post....!!!!!
Every word of appreciation in my limited dictionary is falling short of.
You have not simply posted a wonderful story of IJC--- rather you have artfully orchestrated a live movie out of it.
It is possible only after you have lived, reeled and edited it in your imaginations umpteen times.
I honour this devotion.
My email ID is praveend_w@yahoo.com. I would be grateful if you could please send me the link.
Eagerly waiting for more posts to come.

Raj Joshi said...

Vishal Bhai,
We were expecting a Holi special from you. When is the next post? Thanks Bro!

चन्द्रकांत दीक्षित said...

Main samajhta tha ki main hi comics padhta hun par mujhe ye jaanka achcha laga ki mere jaise aur bhi bade hain jinka bachpan abhi jinda hai.

Big Salute to you.

Mohammed Gori said...

VishalJi,

Skriya Comics ke liye.

Please do not take it otherwise...41 comments already and no new comics...jitna effort aapne reply karne mein lagaya..utne mein to aap 10 comincs publish kar sakte...

Sirf wahwahi he lootengeya aage jaldi comics bhi post karenge...
Aapki shero-shayri to umda hai..lekin log to primarily comics ke liye tashreef laate hain...kripya ye dhyan rakhen...Reading the comments..looks like ek comics 3 mahine mein and wahwahi lootne ka jariya ban gaya hai apka post...
hope you do not take it otherwise...just a constructive comment..

Comic World said...

जनाब गोरी साहब शुक्रिया आपकी कमेंट के लिए लेकिन मुआफ़ कीजिये आप तो कुछ इस तरह फ़रमाईश कर रहे हैं जैसे कॉमिक्स स्कैन/पोस्ट करना विशाल भाई का पेशा हो और आपने उन्हें इस काम के लिए मेहनताना दे रखा हो ! एक कॉमिक स्कैन/पोस्ट करने में कितना समय और कितनी उर्जा लगती है आपको उसका अंदाज़ा भी है ! इस भागदौड़ और व्यस्तता से भरी ज़िन्दगी में एक ब्लॉगर किस तरह समय निकलकर निस्स्वार्थ भाव से पोस्ट तैयार करता है इसको आपको समझना चाहिए ।

VISHAL said...

मोहम्मद गौरी !!
हजूर गौरी साब , गुस्ताखी मुयाफ़ ! अगर आप अपनी Real ID को इस्तेमाल करके यह टिप्पणी करते तो मुझे ख़ुशी होती :) आपके अल्फाजों का लहजा मुझे यह आभास करा रहा है की मैं आपसे पहले भी रूबरू हो चूका हूँ !!
दरअसल ऐसा है मित्र प्यारे , की अतिव्यस्तता की वजह से कॉमिक स्कैन करना मुमकिन नहीं है आजकल , जब भी कभी समय मिलेगा तो जरुर एक नयी पेशकश के साथ मिलूँगा
वैसे आपका "नया" नाम पड़कर गौरी और पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुए तराई के दोनों युद्ध जरुर याद आ गए :)
बहरहाल , मेरी वजह से जनाब को जो तकलीफ हुई , उसके लिए तो मैं क्षमा याचना की प्रार्थना ही कर सकता हूँ जहाँपनाह से !

Mohammed Gori said...

Muafi chahonha agar apkobura kaga. Mera kati ye irada nhin tha.
Main to naya hoon. Nacheez to muaf kariye agar alphaz bure lage.

Main to din main 10 dafa apke site par ata hon ummidon ke sath ke kuch naya padhne ko mile.comics na sahi.Vishalji ke koi post to mile.

Phirse ek bar Muafi..mera katai ye irada nahin tha. Main ab koi comment post nhin karega.


ARUN KUMAR said...

Thanks a lot for posting the comic. Still couldn't locate the link. I hope u send me thru mail.

I also have loads of Indrajal Comics right from my childhood days. Just waiting to scan & post them on a web-site.

ARUN KUMAR said...

Sorry ! not mentioned my e-mail is. It's sonu.kumar.7719@gmail.com

VISHAL said...

Dear Arun Kumar

Thnanks for your kind visit. Whenever you have time, then scan some old Indrajal issues in hindi. How many indrajal comics do you have in your collection ?

jagdeep singh said...

wah wah Zaheer bhai. Mazaa aa gaya. Link to nahi mil paya fir bhi kaafi rochak jaankaria padhne ko mili. main hindi ko tarjeeh deta hu. matrabhasha hone ke karan ye seedhe aatma me utar jaati hai aur mere dimag ko ise translate karne ki mashakkat nahi karni padti. link dhondne ke chakkar me VETAAL_GUFA DAITYA KA APHARAN, Vakul Durg Ka Rehasya mil gai. shukriya Vishal bhai. ye dekh ke mazaa aa gaya ki jin piranha machlio se khud Vetaal bhi bach bacha ke nikal leta hai unka Hazz ko koi khauf nahi aur uski khaal ko kaat kar khud unke hi daant toot gae. Bhai mazaa aa gaya. Kripya mujhe iska linka bataiye. Dhanyawaad. Mera e-mail id hai guygolden@gmail.com

Ranjan said...

thanx bhai ...but badi mehnat lagi link dhoondhney me..subah 8 baje se 10 baje tak yahi karta raha...zabardast jagah chupaya hai aapney link...uskey baad comics padhney ka maza to kai guna ho gaya..

VISHAL said...

रंजन जी , आपका हार्दिक स्वागत है , हज्ज की हर कहानी अपने आप में बेमिसाल है !

Related Posts with Thumbnails

Contributors

Navdeep
Srinivas
Frank
Achala
Venkit